-------------
आरपीएफ की महिला उपनिरीक्षक समेत सात जवानों को जेल
इंजीनियर राहुल सिंह को चलती ट्रेन से फेंक कर मारने के मामले में हुई कार्रवाई
24 अगस्त को मऊरानीपुर के पास हुई थी घटना, महोबा जीआरपी कर रही है जांच
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
चलती ट्रेन से मऊरानीपुर के पास इंजीनियर राहुल सिंह को फेंककर मारने के मामले में बुधवार को जीआरपी महोबा ने झांसी आरपीएफ की महिला उपनिरीक्षक समेत सात जवानों को जेल भेज दिया। सभी पर चंबल एक्सप्रेस में सवार राहुल से अभद्रता और ट्रेन से फेंकने का आरोप है।
24 अगस्त को बिहार के कैमूर जिले के थाना मोहनिया क्षेत्र के गांव मुखरी निवासी इंजीनियर राहुल सिंह चंबल एक्सप्रेस के स्लीपर कोच एस टू में यात्रा कर रहे थे। आरोप है कि दोपहर करीब दो बजे आरपीएफ स्क्वॉड के जवान कोच में आए और टिकट चेकिंग कर्मचारी के साथ यात्रियों के टिकटों की जांच करने लगे। इस दौरान राहुल के पास बैठे एक युवक से आरपीएफ दल की नोकझोंक होने लगी। राहुल इस दृश्य को अपने मोबाइल में रिकार्ड करने लगा। इस बात का पता लगने पर आरपीएफ जवान राहुल से चिढ़ गए और उन्होंने अभद्रता कर उसके साथ मारपीट कर दी। कुछ देर बाद ही मऊरानीपुर के निकट राहुल की ट्रेन से गिरने पर मौत हो गई। बाद में राहुल के चाचा शतुरंजय कुमार ने महोबा जीआरपी में उक्त जवानों के खिलाफ अभद्रता, मारपीट और ट्रेन से फेंकने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी तरह एक रिपोर्ट कोच में सवार अधिवक्ता कुलदीप कुमार शर्मा ने भी इलाहाबाद पहुंचकर जीआरपी में दर्ज कराई थी।
चूंकि, राहुल के रिश्तेदार राजेंद्र प्रताप सिंह बिहार भाजपा में प्रदेश महामंत्री (संगठन) के पद पर हैं, जिन्होंने मामले की शिकायत रेलमंत्री, मुख्यमंत्री के अलावा अन्य अफसरों से की थी। इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की भी सिफारिश की गई है। जीआरपी ने रेलवे से इन जवानों के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद जीआरपी ने जांच शुरू कर दी।
बुधवार को महोबा जीआरपी में आरपीएफ की उपनिरीक्षक राजकुमारी गुर्जर, अर्चना सिंह, पिंकी यादव, रेखा शुक्ला, आशा, मुकेश कुमार मीणा और संतराम मीणा पेश हो गए। पुलिस अधीक्षक (रेलवे) डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।