गुनहगार बनने से बचा व्यापारी
- महिला चोर ने मदद के नाम पर फंसाने की कोशिश की
- आरपीएफ ने कसूरवार बनाने में नहीं छोड़ी कसर
- जीटी एक्सप्रेस से एयरफोर्स अधिकारी का चुराया था सूटकेस
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रेलवे स्टेशन पर अंजान महिला चोर की मदद कर रहा बरुआसागर निवासी एक व्यापारी जीआरपी की जांच से गुनहगार होने से बच गया। हालांकि, आरपीएफ ने उसको कसूरवार साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मगर, जांच में सच सामने आने पर व्यापारी को छोड़ दिया गया। आरोपी महिला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।
शनिवार को नई दिल्ली के उत्तम नगर के मोहन गार्डन निवासी आरके ठाकुर जीटी एक्सप्रेस के एस 6 कोच की बर्थ नंबर 60 पर सवार होकर इटारसी से नई दिल्ली जा रहे थे। ट्रेन जब करीब रात 12 बजे झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर खड़ी थी, तभी एक महिला ने उनका ट्राली सूटकेस चुराया और कोच से नीचे उतर गई। महिला रेलवे ब्रिज पर चढ़कर स्टेशन से बाहर निकलना चाहती थी। सूटकेस भारी होने के कारण सीढ़ियों के पास खड़े बरुआसागर निवासी एक व्यापारी से महिला ने मदद मांगी। महिला ने खुद को गर्भवती बताया।
व्यापारी मदद करने के लिए आगे बढ़ा, तभी सादा वर्दी में मौजूद एक आरपीएफ जवान ने उनको पकड़ लिया। जवान ने अपने एक साथी को भी बुला लिया। जांच में पता लग गया कि महिला उक्त सूटकेस चुराकर लाई है। दोनों को थाने लाया गया। थाने में महिला ने व्यापारी को अपना साथी बताया। व्यापारी ने अपना पक्ष रखा, लेकिन उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। आरपीएफ ने महिला के बयान का वीडियो बनाया। रविवार की सुबह आरपीएफ ने आवश्यक कार्रवाई कर दोनों को जीआरपी के सुपुर्द कर दिया।
इधर, जीआरपी ने दोनों पक्षों से पूछताछ की। जीआरपी को जांच में लगा कि व्यापारी इस मामले में बेवजह फंस रहा है। जिस यात्री का सूटकेस चोरी हुआ था, वह भी सूचना मिलने पर झांसी आ गए। उन्होंने भी व्यापारी को बेकसूर बताया। जीआरपी ने व्यापारी के बारे में और भी जानकारी एकत्र की। हर तरह से संतुष्ट होने के बाद जीआरपी ने व्यापारी को छोड़ दिया। वहीं, जीआरपी ने आरोपी महिला पंजाब के छतरपुर क्षेत्र के रानी की तलैया निवासी प्रीति कौर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
चोरी स्वीकारने के लिए पीटा
पीड़ित व्यापारी ने बताया कि ‘मैं अक्सर व्यापार के सिलसिले में आगरा जाता हूं। शनिवार की रात मैंने जनरल टिकट लिया। आगरा जाने के लिए प्लेटफार्म चार-पांच पर ट्रेन के इंतजार में खड़ा हो गया। दो-तीन ट्रेनें आईं, जिनमें भीड़ अधिक थी। मैं उन ट्रेनों में टीटीई की तलाश में अलग-अलग कोचों में चढ़ा भी, लेकिन टीटीई के नहीं मिलने पर प्लेटफार्म पर अगली ट्रेन का इंतजार करने लगा। इस बीच प्लेटफार्म पर जीटी एक्सप्रेस आ गई। मैं उस समय जीआरपी थाने के बगल में निकलने वाले ब्रिज के पास खड़ा था। उसी समय एक महिला मेरे पास आई और भइया कहकर बोली की वह गर्भवती है। सूटकेस सीढ़ियों के ऊपर चढ़ाने में उसकी मदद कर दें। मैं महिला की मदद कर पाता कि तभी सादा वर्दी में आए एक सिपाही ने उसकी कॉलर पकड़ ली और सूटकेस के संबंध में पूछताछ करने लगा। मैंने कहा कि सूटकेस महिला का है और वह सूटकेस सीढ़ियों पर चढ़ाने में उसकी मदद कर रहा था। इसके बाद मुझे और महिला को आरपीएफ थाने लाया गया। यहां पता लगा कि कि महिला जीटी एक्सप्रेस के किसी यात्री का सूटकेस चोरी करके ले जा रही थी। पूछताछ में महिला ने उसे अपना साथी बता दिया। मैंने कई बार आरपीएफ को सच्चाई बताई, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी र्गइं। मैंने कहा कि आप सीसीटीवी फुटेज देख सकते हैं। महिला का साथी स्वीकारने के लिए तीन जवानों ने मुझे जमकर पीटा, लेकिन मैंने स्वीकार नहीं किया। बाद में एक सिपाही ने मुझसे कहा कि पचास हजार रुपये दे दो तो तुम्हें छोड़ देंगे। मगर, मैंने कहा कि जब मेरी गलती नहीं है तो रुपये क्यों दूं? सुबह मेरे बयान की वीडियोग्राफी कराए बिना ही मुझे जीआरपी को सौंप दिया गया।’
फोटो
जांच में संतुष्ट होने के बाद ही छोड़ा
मैंने व्यापारी के बारे में हर स्तर पर जानकारी एकत्र की। मैं जब संतुष्ट हो गया कि व्यापारी का इस मामले में कोई हाथ नहीं है। वह बेवजह फंस गया है। निर्दोष व्यक्ति जेल जाए, यह कानून के खिलाफ है। इसके बाद ही उसे छोड़ा गया।
- अजीत कुमार सिंह, प्रभारी निरीक्षक जीआरपी।
व्यापारी का आरोप गलत
व्यापारी जो थाने में मारपीट और रुपये मांगने का आरोप लगा रहा है, यह गलत है। प्लेटफार्म पर जवान सादा कपड़ों में मौजूद रहते हैं। सारी स्थितियां पता होने के बाद ही उनको पकड़कर जीआरपी के सुपुर्द किया गया।
- एके यादव, प्रभारी निरीक्षक आरपीएफ।