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ट्रेन से फेंकने के मामले का फालोअप,,,-City

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ट्रेन से गिरा या फेंका गया राहुल?
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सब हेड: उलझता जा रहा मामला, नहीं मिले मोबाइल और वीडियो क्लिपिंग
क्रासर
जीआरपी ने घटनास्थल से जुटाए साक्ष्य, इलाहाबाद में भी एक अधिवक्ता ने दर्ज कराई रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी/ मऊरानीपुर।
चंबल एक्सप्रेस से गिरे इंजीनियर राहुल सिंह की मौत का मामला उलझता जा रहा है। राहुल के चचाचा ने जीआरपी महोबा में तो इलाहाबाद में भी एक अधिवक्ता ने अज्ञात लोगों के खिलाफ राहुल को ट्रेन से फेंकने की रिपोर्ट दर्ज कराई हैं। पता चला है कि अधिवक्ता भी उसी ट्रेन में सफर कर रहे थे। इधर, शनिवार को जीआरपी के जांच अधिकारी ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाएं। हालांकि, अभी तक राहुल के मोबाइल और वीडियो क्लिपिंग का पता नहीं लग सका है, जो हादसे से जुड़े सबसे बड़े सबूत है।
बिहार के कैमूर जिले के थाना मोहनियां क्षेत्र के गांव मुखरी निवासी 22 वर्षीय राहुल सिंह चंबल एक्सप्रेस में दिल्ली से वाराणसी के लिए यात्रा करते समय बृहस्पतिवार की शाम पांच बजे मऊरानीपुर स्टेशन से कुछ दूरी पहले ग्राम पचौरा पुलिया के पास ट्रेन से गिरे थे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उनकी मौत हो गई थी। राहुल के चाचा शत्रुंजय कुमार सिंह ने महोबा जीआरपी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि ट्रेन में मौजूद कुछ वर्दीधारी सामान बेचने वालोें से टीटीई की मौजूदगी में अवैध वसूली कर रहे थे, जिनका वीडियो राहुल ने बना लिया था। इसी दौरान एक वर्दी वाले ने उसे ऐसा करते हुए देख लिया, जिस पर सभी सारी हदें पार करते हुए तीन दौर में राहुल की निर्मम तरीके से पिटाई की। राहुल से उसका जूता निकलवाया और यात्रियों के बार-बार मना करने के बाद भी निर्ममतापूर्वक जूतों से पीटा। महिला यात्रियों के साथ अश्लील हरकतें करने के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। जब इससे भी उनका मन नहीं भरा तो चलती ट्रेन से राहुल को फेंक दिया। राहुल की जेब से मऊरानीपुर पुलिस को 42 सौ रुपये तो मिले, लेकिन उसके गले की सोने की चेन, ब्रेसलेट, मोबाइल व बैग नहीं मिला था।
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मामले की जांच एसपी (रेलवे) डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने जीआरपी महोबा थाना प्रभारी शमीम खान को सौंपी है। शनिवार को शमीम खान ने कोतवाली मऊरानीपुर पहुंचकर राहुल की पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी ली। घटनास्थल पर भी साक्ष्य जुटाए।
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इन सवालों के चाहिए जवाब
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- कहां गए मोबाइल और वीडियो क्लिपिंग
- सादा वर्दी में क्यों थे आरपीएफ जवान?
- रुपये होने के बाद भी बिना टिकट क्यों चल रहा था राहुल?
- ऐसी क्या बात हुई कि राहुल को ट्रेन से कूदना पड़ा?
- मेमो बनने पर आरपीएफ ने राहुल को क्यों नहीं पकड़ा।
- एक अधिवक्ता को इलाहाबाद में जाकर क्यों करानी पड़ी रिपोर्ट?
- अवैध वेंडरों को पकड़ने गई आरपीएफ टिकट चेकिंग में क्यों शामिल हो गई?
- मऊरानीपुर सेक्शन लोको थाने में आता है तो स्टेशन की टीम क्यों गई चेकिंग करने?

इनसे होगी पूछताछ
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- कोच यात्रियों से
- कोच टीटीई एमके गुप्ता से
- इलाहाबाद में रिपोर्ट दर्ज कराने वाले अधिवक्ता से
- आरपीएफ टीम में शामिल जवानों से

आरपीएफ को क्लीन चिट
आरपीएफ के जांच अधिकारी सहायक सुरक्षा आयुक्त घनश्याम मीणा ने बताया कि ट्रेन के आरक्षित एस टू कोच में भीड़ अधिक थी। इस कारण टीटीई ने आरपीएफ टीम से मदद मांगी। राहुल बिना टिकट था। टीटीई ने उससे जुर्माना भरने को कहा। वह जब जुर्माना देने को तैयार नहीं हुआ तो टीटीई ने उसे पकड़ने के लिए आरपीएफ को मेमो दिया। बिना टिकट तीन-चार और भी यात्री थे। आरपीएफ जवान कुछ समझ पाते, इसके पहले ही बिना टिकट यात्रियों ने दूसरे कोच की तरफ दौड़ लगा दी। ऐसे में राहुल ट्रेन से कैसे गिर गया? पता नहीं चला। इससे आरपीएफ जवानों का कोई दोष नहीं हैं। आरपीएफ टीम में कुछ वर्दी और कुछ सादा ड्रेस में थे। सभी अवैध वेंडरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान में गए थे, जिसमें एक महिला उपनिरीक्षक, चार महिला आरक्षी और दो जवान शामिल थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को दे दी है।
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