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पोस्टमार्टम के लिए कहा, तो तीमारदार पीटने लगे -Lalitpur

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पोस्टमार्टम के लिए कहा, तो तीमारदार पीटने लगे
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- पत्रकार वार्ता में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने लगाया आरोप
- मरीज को बचाने के लिए पैरीटोनियल डायलिसिस भी की: डॉ. जकी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शनिवार को हुई मारपीट की घटना पर अस्पताल प्रशासन ने पत्रकार वार्ता बुलाकर अपना पक्ष रखा। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. संजया शर्मा ने कहा कि मरीज सल्फास खाकर आया था। उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। हरसंभव कोशिश के बाद जब उसकी मौत को गई तो परिजनों से पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा गया। इतने में परिजन भड़क गए और जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट शुरू कर दी।
थाना सीपरी बाजार स्थित नंदनपुरा निवासी सागर पांडेय (18) की मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत के बाद परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट हुई थी। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और जूनियर डॉक्टरों पर बुरी तरह मारपीट करने का आरोप लगाया था। इससे उन्हें काफी चोटें आईं। रविवार को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस प्रकरण पर पत्रकार वार्ता बुलाई। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. संजया शर्मा ने बताया कि सल्फास खाने से मरीज की हालत बहुत नाजुक थी। उसे वार्ड आठ के आईसीयू में भर्ती किया गया था। नब्ज और बीपी नहीं मिल रहा था। इस पर वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया। इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी गई।
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मरीज का इलाज कर रहे डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि सल्फास खाने के चलते मरीज की पैरीटोनियल डायलिसिस तक की गई, ताकि उसकी जान बच सके। लाख कोशिश के बाद भी जब मरीज मर गया तो परिजनों से पोस्टमार्टम कराने को कहा गया। इस पर वह भड़क गए और जूनियर डॉक्टर से मारपीट करने लगे। इसके बाद भी जूनियर डॉक्टर शांत रहे लेकिन परिजनों ने महिला चिकित्सक के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद हालत और बिगड़ते चले गए। सीएमएस डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने मामले में तीमारदारों की ही गलती बताई।
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