फर्जीवाड़ा कर हड़पी रानीबाग की जमीन
ललितपुर। फर्जीवाड़ा कर रानीबाग की आठ एकड़ नजूल भूमि को राजस्व भूमि में तब्दील कर हड़पने का मामला सामने आया है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने जमीन के गलत तरीके से मालिक बन बैठे 12 लोगों को भूमाफिया घोषित कर दिया है। जमीन को मुक्त करवाने के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
जिलाधिकारी ने एडीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। जांच समिति ने पाया कि भूमिधरी घोषित करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। यह जमीन जगदीश शरण अग्रवाल के पूर्वजों ने टीकमगढ़ के नरेश महेंद्र सिंह जूदेव और वीर सिंह जूदेव से 1961 में 70 हजार में खरीदी थी। जबकि इस भूमि के विक्रय का अधिकार ही नहीं था। जमीन को खरीदेने के बाद नजूल की जमीन में अपना नाम चढ़वाने के लिए जगदीश शरण आदि ने जिलाधिकारी के न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगरपालिका और एसडीएम से आख्या मांगी। एसडीएम ने तहसीलदार से इस संबंध में आख्या मांगी इस तहसीलदार ने नजूल की जमीन को राजस्व की जमीन के लिए उपयुक्त नहीं पाया। वहीं, नगरपालिका अधिशासी अधिकारी ने 12 जनवरी 2012 को भूमाफिया के हित में जिलाधिकारी को आख्या दी। उधर, एसडीएम के दबाव में तहसीलदार ने भी भूमाफिया के हित में आख्या देनी पड़ी। इसी आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने 10 मई 2015 में भूमाफिया का नाम दर्ज कराने का फैसला दे दिया। कुल मिलाकर पूरे प्रकरण में किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की मंशा से पूरी व्यवस्था जगदीश शरण के पक्ष में खड़ी हो गई। सबका उद्देश्य यही था कि किसी भी प्रकार से जगदीश शरण आदि को इस भूमि का अधिकार दे दिया जाए। जांच टीम के अनुसार नजूल की जमीन को राजस्व में लाने का षड़यंत्र नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी अवनींद्र कुमार की आख्या 12 जनवरी 2012 से प्रारंभ हुआ, जो 10 मई 2015 को पूर्ण हुआ
इस षड़यंत्र की शिकायत आईजीआरएस (मुख्यमंत्री का शिकायती पोर्टल) पर वकील महेंद्र पांचाल और आनंद चतुर्वेदी की ओर से की गई। उसी शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह के नेतृत्व में 12 सितंबर 2017 को जांच कमेटी गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट 3 अक्तूबर 2017 को कमेटी ने जिलाधिकारी को सौंपी। रिपोर्ट में पाया गया कि रानीबाग की नजूल की भूमि को अनियमित तरीके से राजस्व के कागजातों में दर्ज करवा लिया गया है। हड़पी गई आठ एकड़ जमीन की कीमत वर्तमान में 58.30 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
कमिश्नर को भेजी निगरानी रिपोर्ट
इस प्रकरण में एडीएम के नेतृत्व में गठित की गई चार सदस्यीय टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट (निगरानी रिपोर्ट) दे दी है। मंडलायुक्त को सौंप दिया गया है। जमीन पर फर्जी तरीके से मालिकाना हक पाने वाले लोगों को भूमाफिया की श्रेणी में शामिल किया गया है।
मानवेंद्र सिंह, जिलाधिकारी।