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फालोअप: जीआरपी ने सोना बरामद-City

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लूट कांड का फालोअप नाम से टैग, जी ड्राइव के एडीटोरियल फोल्डर में लोगो नाम के क्यूएक्सएल में रखा है। उसे अवश्य लगाएं।
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मोबाइल बना खुलासे का ‘आधार’
वसीम को सिपाही को किया गया फोन बना जीआरपी का मददगार
सोना लूट कांड के आरोपी को पकड़ने के लिए किराएदार बनी थी टीम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
रेलवे स्टेशन पर सिपाही और उसके साथी द्वारा सराफा कारोबारी के कर्मचारी एक किलो सोना लूटने के मामले का खुलासा करने में मोबाइल मददगार बना। घटना के बाद सिपाही को उसके साथी वसीम ने फोन किया था। वसीम के नंबर से लिंक हुए आधार कार्ड की मदद से से पुलिस उसे पकड़ सकी। उसे पकड़ने के लिए जीआरपी की टीम उसकी ससुराल के सामने किराएदार बनकर रही थी।
26 अक्तूबर की रात रेलवे स्टेशन से बांदा निवासी सोना कारोबारी संजय अग्रवाल के कर्मचारी अनिल कुमार सोनी से जीआरपी सिपाही हरीशंकर गौतम ने अपने ललितपुर के रहने वाले साथी वसीम के साथ मिलकर एक किलो सोना लूटा था। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपी अब जेल में हैं। वसीम कैसे पकड़ा गया? यह बात अब सामने आ चुकी है। दरअसल, सोना का बंटवारा होने के बाद 27 अक्तूबर की सुबह जब वसीम ने सिपाही हरीशंकर को फोन लगाया तो उसका मोबाइल स्विच ऑफ था। वसीम पूछता चाहता था कि अब सोने का क्या करना है? दरअसल, बंटवारे के समय सिपाही ने वसीम से कह दिया था कि अगर अपने हिस्से का सोना बेचो तो उसमें से बीस फीसदी ही उसे मिलेगा। बाकी उसे दे देना। इसके बाद वसीम ने अपने मोबाइल नंबर से जीआरपी थाने के लैंड लाइन नंबर पर फोन लगा दिया। एक मुंशी ने फोन उठाया तो वसीम ने उनसे हरीशंकर के बारे में पूछा। मुंशी ने बिना पूछताछ के ही बता दिया कि हरीशंकर तो लूट के मामले में थाने में ही बैठा हुआ है। यह सुनकर ही वसीम घबरा गया और अपना मोबाइल स्विच आफ करके लखनऊ चला गया।
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इधर, जीआरपी टीम जब सिपाही के साथ मौजूद व्यक्ति को पकड़ने के ताना-बाना बुन रही थी, तभी उसे सुबह के समय थाने में आए अज्ञात फोन के बारे में पता लगा, जिसमें संबंधित व्यक्ति सिपाही हरीशंकर के बारे में पूछ रहा था। टीम ने उस नंबर को निकलवा और उसकी जांच की तो उसके मोबाइल नंबर से लिंक आधार कार्ड के कारण वसीम का चेहरा सामने आ गया।
इसके बाद टीम ने ललितपुर उसके पते पर दबिश दी तो पता चला कि वह घर से गायब है। टीम को भरोसा था कि वसीम मौदहा अपनी ससुराल जरूर जाएगा। इस पर टीम सादा कपड़ों में मौदहा पहुंची और उसकी ससुराल के सामने ही खुद को व्यापारी बताकर 1600 रुपये में किराए से एक कमरा ले लिया। ससुराल में आने-जाने वालों की निगरानी शुरू हो गई थी। 30 अक्तूबर की रात ही वसीम अपनी पत्नी को ललितपुर से लेकर मौदहा छोड़ने पहुंचा और टीम के हत्थे चढ़ गया।
वहीं, शुरूआत से ही घटना में अपना हाथ होने से इंकार करने वाले सिपाही हरीशंकर ने न्यायालय में वसीम को देखा तो वह खुद ही टूट गया। उसे बिलकुल उम्मीद थी कि वसीम पकड़ा जाएगा।

तीन लोगों की ले चुका जान
वसीम ट्रक ड्राइवर है। 2015 में वह मुंबई में ट्रक चलाता था। वहां उसके ट्रक की टक्कर से तीन लोगों की मौत हो गई थी। जमानत मिलने पर वह घर लौट आया और यहां ट्रक चलाने लगा। इसके बाद कुलपहाड़ में एक और एक्सीडेंट कर दिया। वर्तमान में वह ललितपुर में ही डीजे सिस्टम की गाड़ी चला रहा था।
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14 साल की सजा
लूट के मामले में अधिकतम 14 साल की सजा का प्रावधान है। जीआरपी ने घटना के मुख्य आरोपी सिपाही हरीशंकर गौतम की बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी है। बर्खास्तगी के बाद उसका परिवार नौकरी से मिलने वाले सभी फायदों से भी वंचित हो जाएगा।
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