सिंचाई विभाग के बेतवा नहर प्रखंड कार्यालय में बिना कार्य कराए ही 75 लाख रुपये से अधिक के भुगतान करने की गूंज शुक्रवार को लखनऊ तक पहुंच गई। प्रमुख अभियंता लखनऊ ने अधीनस्थ अफसरों को जांच रिपोर्ट शीघ्र भेजने के लिए कहा है। झांसी कार्यालय में भी सिर्फ इसी मामले को लेकर अधिकारी व कर्मचारी चर्चा करते रहे। वहीं, जांच कमेटी अभिलेखों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने में लगी रही। अमर उजाला ने शुक्रवार को सिंचाई विभाग के बेतवा नहर प्रखंड कार्यालय में हुए लाखों रुपये के घोटाले का खुलासा किया था। प्रकाशित खबर में बताया गया था कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार ने न तो नहरों की सफाई कराई और नही मरम्मत, फिर भी साठगांठ कर छह फर्मों को 75 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया। इस घोटाले में कार्यालय के कैशियर समेत और भी कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। नहरों की सिल्ट सफाई, नहरों की मरम्मत, नहरों की खुदाई आदि कार्यों के नाम पर मेसर्स मां कामांक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख, मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सितंबर 2019 को 46.53 लाख, मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नवंबर 2019 को 4.98 लाख, मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख, मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख व श्री बाबू प्रसाद तिवारी फर्म को चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख का भुगतान किया गया। इन कार्यों से संबंधित कोई बिल कार्यालय में नहीं पाए गए। इस मामले को प्रमुख अभियंता लखनऊ मुख्यालय अनूप कुमार श्रीवास्तव ने भी संज्ञान में लिया है। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को जल्द जांच रिपोर्ट भेजने के लिए निर्देश दिए है। साथ ही जांच समिति में शामिल अधिशासी अभियंता माताटीला प्रखंड, अधिशासी अभियंता सपरार प्रखंड व खंडीय लेखाकार सिंचाई निर्माण खंड ने उक्त प्रकरणों से जुड़े अभिलेखों की जांच की। यह हो सकती है कार्रवाई प्रमुख अभियंता अनूप कुमार श्रीवास्तव अधीक्षण अभियंता द्वारा भेजी गई रिपोर्ट अपने जांच अनुभाग को देंगे। जांच अनुभाग की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उनके वेतन से वसूली व उनके खिलाफ मुकदमा भी हो सकता है। संबंधित फर्मों को भी काली सूची में डाला जा सकता है। दस फीसदी का चलता है खेल विभागीय सूत्रों की माने तो कोई अधिकारी अगर बिना कार्य के ही ठेकेदारों को भुगतान कर देता है। बदले में ठेकेदारों से बिल लेकर रिकार्ड में लगा दिए जाते हैं, तो ऐसे में दस प्रतिशत धनराशि ठेकेदार और बाकी अधिकारी व कर्मचारियों को मिल जाती है।