झांसी। सरकारी विभागों में कदम-कदम पर भ्रष्टाचार फैला है। आम आदमी इससे परेशान भी है। अफसरों के पास तो स्टाफ द्वारा पैसे मांगने की शिकायत लेकर लोग पहुंचते हैं मगर कानूनी कार्रवाई कराने के लिए विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की चौखट तक ज्यादातर पीड़ितों के कदम नहीं पहुंचते। तभी इन संस्थाओं के पास साल भर में तीन-चार शिकायतें ही पहुंच रही हैं।
किसी भी लोकसेवक के भ्रष्टाचार की शिकायत विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से की जा सकती है। इन लोक सेवकों में समूह क से लेकर घ वर्ग के कर्मचारी शामिल रहते हैं। इसके अलावा विधायक, सांसद, सरकारी ठेकेदार आदि की भी शिकायत की जा सकती है। अराजपत्रित कर्मचारियों की शिकायतें एंटी करप्शन ब्यूरो, जबकि राजपत्रित कर्मचारियों की शिकायत विजिलेंस से की जा सकती हैं।
हालांकि एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया काफी जटिल है। एंटी करप्शन ब्यूरो में तैनात अफसरों का कहना है कि रिश्वत मांगने वाले को पकड़ने के लिए शिकायतकर्ता को पैसा खुद जमा करना होता है। इसी पैसे में रंग लगाकर आरोपी को पकड़ा जाता है। यह पूरी रकम कोर्ट में सुबूत के तौर पर पेश होती है। मुकदमेबाजी की लंबी प्रक्रिया के चलते भी लोग रिश्वतखोरी की शिकायत करने से बचते हैं। उधर, एसपी विजलेंस आलोक शर्मा का कहना है कि जितनी शिकायतेें आती हैं, उनकी जांच के बाद कार्रवाई की जाती है।
इन नंबरों पर करें शिकायत
एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत करने के लिए सीयूजी नंबर 9454401650 पर जबकि विजलेंस में 9454401866 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
13 महीने में पकड़े गए ये मामले
- विजलेंस ने आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई करते हुए पूर्व विधायक दीपनारायण यादव के खिलाफ 30 जुलाई 2022 को एफआईआर दर्ज कराई। पूर्व विधायक पर आय से करीब 23 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
- मऊरानीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी भुवनेंद्र कुमार को एक सहायक शिक्षक से 20 हजार की घूस लेते विजिलेंस टीम ने जनवरी 2022 को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। शिक्षक के खिलाफ जांच चल रही थी। जांच रिपोर्ट से शिक्षक का नाम निकालने के नाम पर रिश्वत मांगी गई थी। बीईओ के खिलाफ विजिलेंस थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।
- झांसी भ्रष्टाचार निरोधक यूनिट ने उरई में विरासत दर्ज करने की एवज में पांच हजार रुपये की घूस मांग रहे लेखपाल को 20 जनवरी 2022 को रंगे हाथ पकड़ा था। बताया गया कि कुसमिलिया गांव के राजेंद्र के पिता के निधन के बाद पांच एकड़ जमीन को वरासत में दर्ज कराने के लिए उसने तहसील में आवेदन किया था। तहसील उरई के कुसमिलिया इलाके में तैनात लेखपाल हरिशंकर निरंजन को इसमें रिपोर्ट लगानी थी। लेखपाल ने इसके एवज में राजेंद्र से दस हजार रुपये घूस मांगी थी।
- भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते ने जमीन का दाखिल खारिज कराने के एवज में रिश्वत मांग रहे लेखपाल को 29 नवंबर 2021 को पकड़ा था। इतवारी गंज के रवि ने लेखपाल बद्रीप्रसाद के खिलाफ छह हजार रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। लेखपाल ने जब रवि को घर के पास पैसे देने के लिए बुलाया, तभी टीम ने रंगे हाथ पकड़ लिया था।