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पोस्टमार्टम करने वालों को कोरोना का खतरा, अज्ञात शवों की नहीं हो रही जांच

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पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और कर्मचारियों पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। ऐसा इसलिए कि अज्ञात शवों का पोस्टमार्टम बिना कोरोना जांच के किया जा रहा है। लॉकडाउन से अब तक जिले मेें 34 शव मिले हैं। सभी के बिना कोरोना जांच के ही पोस्टमार्टम कर दिया गया। इससे चिकित्सक व पोस्टमार्टम कर्मी दहशत में है। इस संबंध में सीएमओ का कहना है कि अज्ञात शवों के सैंपल नहीं लिए जा सकते। जबकि एक सरकारी विभाग में जिम्मेदार पद पर तैनात एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि अज्ञात शव का सैंपल लेकर जांच कराने में कोई हर्ज नहीं है। शव वैसे भी कुछ समय के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इससे संक्रमण के खतरे से बचा जा सकता है। जिले में प्रतिदिन दो से तीन अज्ञात शव मिलते हैं। इसके बाद तीन दिन तक पोस्टमार्टम हाउस में शव सुरक्षित रखा जाता है। वर्तमान में लॉकडाउन से अब तक जिले मेें 34 शव मिले हैं सभी के बिना कोरोना जांच के ही पोस्टमार्टम कर दिया गया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए पोस्टमार्टम हाउस पर आने वाले शवों की कोरोना जांच आने के बाद ही पोस्टमार्टम प्रक्रिया कराने के निर्देश हैं, लेकिन अज्ञात शवों पर यह नियम लागू नहीं हो पा रहा है। उनके मरने तक का समय निर्धारित न होने के कारण सैंपल भी नहीं लिया जा रहा है। बिना जांच के ही अज्ञात शवों के पोस्टमार्टम किए जा रहे हैं। डॉक्टर व पोस्टमार्टम कर्मियों का मानना है अगर किसी कोरोना से मरने वाले का पोस्टमार्टम हो गया तो पूरा स्टाफ संक्रमण की चपेट में आ जाएगा। ऐसे में सभी को हर समय कोरोना का डर बना हुआ है। डॉक्टर से लेकर पोस्टमार्टम कर्मी अपनी सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ध्यान रख रहे हैं। पीपीई किट पहनकर पोस्टमार्टम किए जा रहे हैं, साथ ही कर्मचारी ग्लव्स व मास्क पहनकर अन्य काम करते हैं। अन्य मौतों की जांच के बाद हो रहा पोस्टमार्टम पोस्टमार्टम हाउस पर आने वाले शवों का पोस्टमार्टम से पहले कोरोना टेस्ट कराने का नियम भी लागू है। आदेश दिए गए थे कि बिना कोरोना टेस्ट के किसी भी शव का पोस्टमार्टम नहीं किया जाएगा। संक्रमण को फैलने सेे रोकने के लिए यह फैसला लिया गया था। इस व्यवस्था के तहत मृतक के परिवारीजनों को पोस्टमार्टम से लेकर शव मिलने तक की प्रक्रिया में अधिक समय लगने से थोड़ी परेशानी का सामना जरूर करना पड़ रहा है, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सही बताया गया है। लेकिन, अज्ञात शवों की जांच न होने से संक्रमण फैलने का खतरा जरूर बना हुआ है।
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