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Jhansi News: ठंड में गर्मी का अहसास, सूखे बुंदेलखंड में बढ़ जाएगी फसलों की प्यास

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झांसी। ठंड के सीजन में गर्मी का अहसास होने लगा है। अधिकतम तापमान जहां सोमवार को 28 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। वहीं, न्यूनतम पारा भी साढ़े तेरह डिग्री सेल्सियस रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि 10 से 15 दिन यही हालात रहे तो बुंदेलखंड में फसलों को सिंचाई के लिए ज्यादा पानी की जरूरत पड़ेगी। पानी नहीं मिलने पर फसलों का उत्पादन 15 फीसदी तक घट सकता है।
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जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लोबल वार्मिंग हो रही है और तापमान लगातार बढ़ रहा है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि 2009 में किए गए उनके शोध में सामने आया था कि वर्ष 1905 से 1971 तक तापमान में बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। सन् 1972 से 1991 तक दो दशकों में औसत तापक्रम लगभग 0.15 डिग्री सेल्सियस बढ़ा। इसके बाद प्रति दशक औसत तापमान 0.11 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ रहा है। इस कारण सर्दियों में न्यूनतम तापमान बढ़ रहा है और फसलों को शीत दिवस कम मिल पा रहे हैं।
बीयू के कृषि विज्ञान संस्थान के सहायक शिक्षक डा. संतोष पांडेय का कहना है कि फरवरी में औसत तापक्रम बढ़ने से फसलों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। दलहनी, तिलहनी फसलों में अभी बालियां आ गई हैं। इसमें दाने सिकुड़ने का डर है। यदि एक से दो सप्ताह तक न्यूनतम पारा 10 डिग्री से अधिक रहेगा तो 10 से 15 फीसदी उपज घट सकती है। पूरी फरवरी यही हालात रहे तो उपज 20 से 25 फीसदी तक घट जाएगी। बताया कि गेहूं, जौ आदि की वानस्पतिक अवस्था है। ऐसे में पौधों की वृद्धि रुक सकती है। इससे बालियां कम निकलेंगी या छोटी हो सकती हैं। असिंचित सरसों, अलसी, राई, चना, मसूर उपज प्रभावित हो सकती है। फसलों को सिंचाई के लिए पानी की जरूरत बढ़ जाएगी।
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कार्बन उत्सर्जन कम करके रोक सकते जलवायु परिवर्तन
डॉ. सिंह ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन में कमी करके ही जलवायु परिवर्तन रोक सकते हैं। सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन औद्योगिक संस्थानों से निकलने वाली गैसों, भट्ठों और डीजल-पेट्रोल कार से निकलने वाला धुएं से होता है। इसके अलावा पराली जलाने और खेतों की ज्यादा जुताई करने से भी कार्बन उत्सर्जन होता है।
फरवरी में ये रहा तापमान
दिनांक वर्ष 2021 वर्ष 2022 वर्ष 2023
अधिकतम न्यूनतम अधिकतम न्यूनतम अधिकतम न्यूनतम
एक फरवरी 27.0 11.6 27.5 12.0 21.5 13.0
दो फरवरी 29.0 12.0 26.5 11.8 23.2 13.8
तीन फरवरी 30.5 12.5 26.0 12.4 28.0 13.6
(नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में है।)
फसल रकबा
गेहूं 138550
जौ 5650
राई/सरसों 11250
चना 70650
मटर 98550
मसूर 31550
(नोट: लक्ष्य हेक्टेयर में है।)
पिछले कुछ दिनों से लगातार तापमान बढ़ रहा है। तापमान बढ़ेगा तो मटर और गेहूं को नुकसान होगा। इससे उत्पादन घट सकता है। - अविनाश भार्गव, गढ़मऊ।
कुछ सालों से तापमान बढ़ने से फसलों को सर्दियों में शीत दिवस कम मिल पा रहे हैं। इस बार भी ऐसा ही है। गेहूं की वृद्धि रुकने का खतरा है। - मोहर सिंह, बड़ागांव।
पिछले पांच सालों में झांसी में इस बार 31 जनवरी को सबसे ज्यादा न्यूनतम तापमान रहा है। आगामी चार-पांच दिनों में मौसम शुष्क रहेगा। एक फरवरी को सुबह कोहरा छा सकता है। - आदित्य कुमार सिंह, मौसम वैज्ञानिक।
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