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Jhansi News: ललितपुर और मऊरानीपुर में होगा मोटे अनाज का प्रसंस्करण

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- किसानों को मिलेगी सुविधा तो उत्पादन भी बढ़ेगा
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मोटे अनाज का उत्पादन करने वाले किसानों को उसके प्रसंस्करण के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसके लिए रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की ओर से बड़ी पहल की गई है। विश्वविद्यालय एफपीओ के सहयोग से ललितपुर और मऊरानीपुर में प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने जा रहा है। जबकि, एक प्लांट विश्वविद्यालय परिसर में भी स्थापित किया जाएगा। इन तीनों स्थानों पर किसान अपने मोटे अनाज की उपज का प्रसंस्करण करा सकेंगे।
मोटे अनाज की उपज की दृष्टि से बुंदेलखंड की जलवायु एकदम उपयुक्त मानी जाती है। इसके बावजूद, यह क्षेत्र मोटे अनाज की खेती में अभी पिछड़ा हुआ है। इसकी प्रमुख वजह यहां इसके प्रसंस्करण के साधनों की कमी है। इसकी वजह से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि चालू खरीफ सीजन में जिले में मोटे अनाज की खेती का लक्ष्य 4,095 हेक्टेअर तय किया गया था, लेकिन मक्का, ज्वार, बाजरा व श्री अन्न (मिलेट्स) की बुवाई महज 182 हेक्टेअर में ही हुई। लेकिन, अब रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय इस कमी को दूर करने जा रहा है। 2.65 करोड़ की लागत से विश्वविद्यालय मोटे अनाज के प्रसंस्करण के लिए तीन प्लांट स्थापित करने जा रहा है। दो प्लांट ललितपुर और मऊरानीपुर में स्थापित किए जाएंगे। जबकि, एक प्लांट विश्वविद्यालय परिसर में लगाया जाएगा। ललितपुर और मऊरानीपुर में स्थापित होने वाले प्लांटों का संचालन एफपीओ (किसान उत्पादन संगठन) के जरिये किया जाएगा। इन प्लांटों में मोटे अनाज का प्रसंस्करण कराकर किसान उसका अच्छा मूल्य हासिल कर सकेंगे। तीनों प्लांटों के उपकरणों की खरीद का काम जारी है।
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मोटे अनाज की लक्ष्य के सापेक्ष बुवाई (हेक्टेअर में)
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फसल लक्ष्य बुवाई
मक्का 1677 65
ज्वार 2392 105
बाजरा 8 2
अन्य श्री अन्न 18 10
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आगे की भी है तैयारी
रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की मोटे अनाज के प्रसंस्करण के साथ-साथ इसके आगे की भी तैयारी है। मोटे अनाज से विश्वविद्यालय में बिस्किट, कॉर्नफ्लेक्स आदि का उत्पादन भी किया जाएगा। इसके अलावा किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। ताकि, वह खुद इस काम में दक्षता हासिल कर बाजार से कदमताल कर सकें।
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तीनों प्रोसेसिंग प्लांटों की स्थापना की दिशा में काम तेजी से जारी है। प्लांट स्थापित होने के बाद किसान आसानी से अपनी उपज की प्रोसेसिंग करा सकेंगे। इससे उन्हें उसका अच्छा मूल्य मिलेगा। सुविधाएं मिलने से आने वाले दिनों में यहां मोटे अनाज के उत्पादन में वृद्धि भी होगी। - डाॅ. रुमाना खान, असिस्टेंट प्रोफेसर, कृषि विश्वविद्यालय।
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