संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मोबाइल फोन की लत बच्चों में अब मनोरंजन से बढ़कर जुनून की हद तक जा पहुंची है। जिला अस्पताल में ऐसे कई बच्चे आ रहे हैं, जिन्हें मोबाइल चलाने की ऐसी लत लग रही है कि वह अपने मां-बाप की जान के दुश्मन बन रहे हैं। इतना ही नहीं घटों मोबाइल चलाने के कारण बच्चों में ऑटिज्म जैसी बीमारियां पैदा हो रही हैं।
भागदौड़ भरी दिनचर्या में अक्सर मां-बाप यह सोचते हैं कि बच्चा रोये या उन्हें उनका काम न करने दे, इससे बेहतर है कि उसे बहलाने के लिए मोबाइल फोन दे दिया जाए। लेकिन इससे धीरे-धीरे यह बच्चे मोबाइल फोन के आदि हो रहे हैं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि किशोर अवस्था में आकर भी यह बच्चे ठीक ढंग से बोले नहीं पा रहे हैं। इस समस्या को चिकित्सक वर्चुअल ऑटिज्म की बीमारी बताते हैं। जिला अस्पताल में ऐसे दो से तीन केस हर दिन आ रहे हैं कि जिनमें तीन से लेकर 14 साल तक के बच्चे मानसिक और शारीरिक तौर पर बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
ऐसे हो रहे मोबाइल के लती
बच्चे अपने पसंद की वीडियो देखने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि वह धीरे-धीरे मोबाइल फोन के लती हो गए हैं। मनोरोग विशेषज्ञ बताते हैं कि तीन घंटे से अधिक लगातार मोबाइल फोन की स्क्रीन देखते रहने वाले बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म का खतरा बढ़ने लगता है।
- वर्चुअल ऑटिज्म के ये हैं लक्षण
बच्चा सामान्य काम से बचने लगता है
किसी से भी बात करने में कतराता है
लोगों से नजर मिलाने से भी बचता है
चिढ़चिढ़ापन उनके स्वभाव में आने लगता है।
एक मिनट भी मोबाइल फोन दूर नहीं होने देते।
यदि वह किसी से बात करते हैं तो उनके पास शब्द नहीं होते।
ये बीमारी करने लगती हैं वार
वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हुए बच्चों में विटामिन बी और विटामिन डी की कमी होने लगती है। यह इतना खतरनाक है कि यदि समय पर इलाज नहीं कराया जाता ताे बच्चे की मौत भी हो सकती है। ऐसे कई बच्चे जिला अस्पताल में भी आ रहे हैं।
- ये आए हैं गंभीर केस
केस 1
जिला अस्पताल में आई सात साल की बच्ची मोबाइल फोन पर आने वाले वीडियो में नागिन का शो देखती थी।वह शो में दिखने वाली नागिन के किरदार में खुद को ढालने लगी। जब उसकी मां अस्पताल आई तो भी वह खुद को नागिन बता रही थी। गनीमत रही कि कुछ समय तक चले इलाज के बाद बच्ची ठीक हो गई।
केस 2
छह साल की बच्ची ने जब अपने स्कूल में सहपाठियों को गालियां देना शुरू कर दिया, तब मां को उसके बारे में पता चला। डॉक्टर ने जब बच्ची का इलाज किया और उससे बात की तो पता चला कि वह अश्लील वीडियो देखकर यह गालियां सीखी है।
केस 3
12 साल के बच्चे की स्थिति तो इस हद तक बिगड़ चुकी थी कि उसके शरीर में विटामिन बी का लेवल एक प्रतिशत रह गया था। माता पिता उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो बच्चा खुद से चल भी नहीं पा रहा था। कई दिन अस्पताल में भर्ती रखकर उसका इलाज किया गया, तब बच्चे को बचाया जा सका।
केस 4
13 साल के लड़के को भी मोबाइल फोन की ऐसी लत लगी कि वह हिंसक हो गया। 18 घंटे तक मोबाइल फोन देखने की बात जब मां को पता चली तो उन्होंने उसका मोबाइल रिचार्ज नहीं कराया। बच्चा इतना हिंसक हो गया कि मां पर जानलेवा हमला तक कर दिया।
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वर्जन
मां-बाप को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा तीन घंटे से अधिक किसी भी सूरत में मोबाइल फोन न देखे। यदि ऐसे है तो बच्चा वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हो सकता है। इसके अलावा बच्चों में कई बीमारियां भी पनपने लगती हैं। ऐसे दो से चार मामले हर दिन आ रहे हैं। यदि समय पर इलाज नहीं किया जाता है तो यह बच्चे के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। - डॉ. शिक़ाफ़ा ज़ाफरीन, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, झांसी