बचपन कमजोर हो रहा है। अगर झांसी की बात करें तो पांच साल से छोटे 25 फीसदी बच्चे कम वजनी हैं। जबकि, 41 प्रतिशत नाटे हैं। ये आंकड़े नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएफएचएस) में सामने आए हैं। सर्वे में दावा किया गया है कि जिले में छह माह से छोटे 50 फीसदी बच्चों को लगातार पर्याप्त मां का दूध और 6 से 23 माह के 91 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है। ऐसे में विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों का वजन कम होने से लेकर पर्याप्त लंबाई न होने की ये भी एक बड़ी वजह है।
मां का दूध शिशुओं के लिए संपूर्ण आहार होता है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया का कहना है कि बच्चे के विकास के लिए मां के दूध में जरूरी पोषक तत्व उचित मात्रा में पाए जाते हैं। ये बच्चों के लिए वैक्सीन के रूप में काम करता है, जो बचपन में होने वाली सामान्य बीमारियों से बचाता है। छह महीने के बाद ही बच्चे को ऊपरी आहार देना शुरू करना चाहिए। जबकि, स्तनपान दो साल या उससे अधिक तक जारी रखना चाहिए।
वहीं, मेडिकल कॉलेज की पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. सुधा शर्मा ने बताया कि बच्चों के लिए पहले 1000 दिन तेजी से शारीरिक व त्वरित मानसिक विकास का समय होता है और आजीवन स्वास्थ्य व बुद्धि के निर्माण का अवसर होता है। इसका लाभ बच्चे को तभी मिल सकता है, जब उसे लगातार स्तनपान कराया जाए। मगर 2020-21 में हुआ एनएफएचएस-5 का सर्वे बताता है कि झांसी में स्तनपान से लेकर बच्चों को पूरक आहार मिलने तक की स्थिति ठीक नहीं है।
छह महीने से छोटे 49.7 फीसदी बच्चों को ही लगातार मां का दूध पिलाया गया। जबकि, वर्ष 2015-16 में हुए एनएफएचएस-4 सर्वे में ये 52.4 प्रतिशत था। जनपद में छह से 23 महीने के 10.7 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त भोजन मिलता है। इसमें पिछले पांच सालों में 0.4 प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई है। पांच साल से छोटे 40.9 फीसदी बच्चों की लंबाई उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ी। ऐसे में वो नाटे रह गए। जबकि, लंबाई की तुलना में 25.2 प्रतिशत का वजन कम रह गया।
ये भी जानें
- तीन साल से छोटे 12.7 फीसदी बच्चों को ही जन्म के शुरूआती एक घंटे में दूध मिल पाया।
- झांसी में पांच साल से कम उम्र के 39.3 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट हैं।
- जिले में पांच साल से कम आयु के 3.3 प्रतिशत बच्चे ओवरवेट हैं।
- छह से 59 महीने के 70.3 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है। इनका हीमोग्लोबिन 11 यूनिट से कम है।