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जनवरी 2020 के बाद चार्ट में कटिंग कर बनी फर्जी मार्कशीट!

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में जनवरी 2020 के बाद चार्ट में कटिंग कर फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाई गई है। समिति की जांच में जो तथ्य निकलकर आए हैं, वो इस ओर इशारा कर रहे हैं। अब पिछले दो साल से अभिलेख विभाग में तैनात रहे कर्मचारियों को सोमवार को कमेटी के सामने पेश होना होगा।
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बीयू में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने के प्रकरण की समिति ने जांच शुरू कर दी है। शुरूआती जांच में ही काफी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से दिसंबर 2019 में छात्र का सत्यापन कराया गया था। जनवरी 2020 में बीयू ने छात्र की मार्कशीट और डिग्र्री फर्जी होने का जवाब भेज दिया था। जांच समिति के सदस्यों ने बताया कि इसलिए ऐसा लग रहा है कि जनवरी 2020 के बाद ही चार्ट में कटिंग की गई है। जांच में ये तथ्य भी सामने आया है कि इस साल छात्र की फर्जी डुप्लीकेट मार्कशीट बना दी गई। वहीं, जब डिग्री बनाने के लिए आवेदन किया गया तो एक अधिकारी को चार्ट में दर्ज रिकॉर्ड में एलएलबी प्रथम, द्वितीय वर्ष से तृतीय वर्ष के अक्षर अलग दिखे। फिर मामला पकड़ में आ गया। अब पिछले दो सालों में जितने भी कर्मचारी अभिलेख विभाग में तैनात रहे हैं, उनको कमेटी के सामने बुलाया जाएगा। समिति कर्मचारियों से जवाब तलब करेगी।
फोरेंसिक विभाग की भी ली जा रही मदद
जांच में फोरेंसिक विभाग की भी कमेटी मदद ले रही है। अब फोरेंसिक विभाग के सदस्य चार्ट में कटिंग से पहले किसका नाम और नंबर लिखे हुए थे, इसकी पड़ताल कर रहे हैं। जल्द ही विभाग के सदस्य अपनी रिपोर्ट कमेटी को सौंपेंगे। इसके अलावा चार्ट कटिंग में किसकी लेखनी है, इसका भी पता लगाया जाएगा।
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प्रकरण की जांच के लिए समिति का गठन किया जा चुका है। समिति ने अपनी जांच भी शुरू कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. मुकेश पांडेय, कुलपति, बीयू।
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