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बुंदेलखंड में निर्यात को बढ़ावा देने की खातिर खुलेंगे कार्गों स्टेशन

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झांसी। बुंदेलखंड में आयुर्वेदिक दवाओं समेत विशेष कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए झांसी रेल मंडल के अंतर्गत प्रमुख स्टेशनों के पास कार्गों स्टेशन भी खोलने की तैयारी है। इनकी मदद से निर्यात सेंटरों तक आसानी से उत्पाद पहुंचाए जा सकेंगे। यहां से बाहरी देशों में इसे भेजा सकेगा। इसके अलावा दूसरे राज्यों तक भी यह कृषि उत्पाद भेजे जा सकेंगे।
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बुंदेलखंड के ललितपुर, झांसी, महोबा आदि जगहों में श्यामा तुलसी, अश्वगंधा समेत अन्य औषधीय जड़ी-बूटियों की प्रचुर उपलब्धता है। हर साल करीब 250 करोड़ रुपये के हर्बल उत्पाद बाहरी देशों में भेजे जाते हैं लेकिन, अभी इसके करीब एक हजार करोड़ रुपये तक बढ़ने की गुंजाइश है। विदेश निर्यात केंद्र तक इनके न पहुंच पाने से यह उत्पाद बाहर नहीं जा पाते। इसी तरह बुंदेलखंड की मूंगफली, उर्द समेत कई दलहनी उत्पादों की भी काफी मांग है लेकिन, बाजार उपलब्ध न होने से इनकी सही कीमत नहीं मिल पाती। मंडल के रेल स्टेशनों के पास कार्गों स्टेशन खुलने से उत्पादकों की यह समस्या खत्म हो सकेगी। खास बात यह है कि यह कार्गों स्टेशन प्राइवेट एजेंसी भी आरंभ कर सकती है। स्टेशन के पास खुद की जमीन होने वाले को प्राथमिकता मिलेगी। रेलवे प्राइवेट कार्गों खोलने में मदद करेगा। इसके बाद इनकी मदद से कृषि उत्पाद निर्यात सेंटरों तक पहुंचाने के साथ ही देश के दूसरे हिस्सों में पहुुंचाया जा सकेगा। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि रेलवे बोर्ड के निर्देश के मुताबिक कार्य कराया जा रहा है।
बांग्लादेश जाता है बुंदेलखंड से गेहूं
बुंदेलखंड के ललितपुर, महोबा, चित्रकूट, छतरपुर, टीकमगढ़, दतिया, हमीरपुर आदि स्थानों से गेहूं बांग्लादेश भेजा जाता है। दतिया, ललितपुर एवं मुरैना स्टेशन की साइडिंग से यह लदान होता है। इसके बाद पश्चिम बंगाल के रास्ते गेहूं बांग्लादेश पहुंचता है। प्रत्येक मालगाड़ी पर करीब 55 लाख रुपये की राजस्व रेलवे के खाते में भी आता है। बुंदेलखंड के अन्य स्टेशनों में भी कार्गों स्टेशन खुलने से इस निर्यात में भी इजाफा होने की उम्मीद है।
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