आर्थिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्र बुंदेलखंड के लोगों ने देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर राष्ट्र के प्रति प्रेम और समर्पण का जज्बा खूब दर्शाया। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि क्षेत्र के सातों जनपदों में पिछले एक सप्ताह के दरम्यान नौ करोड़ 31 लाख रुपये के तिरंगे झंडों की बिक्री हुई। हर घर तिरंगा अभियान के दौरान क्षेत्र का कोना-कोना देश प्रेम के तीन रंगों से सराबोर नजर आया।
देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर सरकार की ओर से 11 से 17 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान चलाया गया था। सरकार की ओर से इस अभियान के दरम्यान घर-घर तिरंगा झंडा फहराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन, लोगों ने इससे आगे बढ़कर अपने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति प्रेम का इजहार किया। अभियान के दौरान घर-घर की छत पर तिरंगे झंडे लहराते नजर आए। इसके अलावा दुकानों, प्रतिष्ठानों, सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों की शोभा भी तिरंगे झंडों ने बढ़ाई। इतना ही नहीं, वाहन व फुटपाथी दुकानों पर भी शान से तिरंगे झंडे लगाए गए। 15 अगस्त को तो आलम ये रहा कि कमोबेश हर हाथ में तिरंगा नजर आया।
लोगों के राष्ट्र के प्रति इसी समर्पण के भाव की वजह से तिरंगे झंडों का कारोबार खूब हुआ। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि केवल झांसी जनपद में ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने 1,49,984 झंडे बेच डाले। जबकि, उनके पास मांग इससे भी कहीं अधिक पहुंची थी। खादी ग्रामोद्योग की दुकानों में भी खादी के झंडों की कमी पैदा हो गई थी। ऐसे में लोगों ने बाजारों की ओर रुख किया। कारोबारियों ने बाजार की मांग पूरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी का नतीजा रहा कि बुंदेलखंड के सातों जनपद में हर घर तिरंगा अभियान के दौरान 37 लाख 25 हजार तिरंगे झंडे बेचे गए, जिनकी कीमत नौ करोड़ 31 लाख 25 हजार रुपये आंकी गई है।
कहां कितने बिके झंडे
जनपद झंडों की संख्या
झांसी 07 लाख
ललितपुर 04 लाख
जालौन 5.5 लाख
बांदा 6.5 लाख
हमीरपुर 05 लाख
चित्रकूट 4.5 लाख
महोबा 4.75 लाख
चार रुपये की एक बिकी बांस की डंडी
झंडे लगाने के लिए बांस की डंडियों की भी खूब मांग रही। बांस कारोबारियों ने बांसों को काट-काटकर डंडियां तैयार कीं। एक-एक डंडी चार-चार रुपये तक में मिली। जबकि, थोक में यह डंडियां साढ़े तीन सौ रुपये प्रति सैकड़ा की दर से बेची गईं।