झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में मार्कशीट सत्यापन में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। दो साल पहले सत्यापन रिपोर्ट में जिस छात्र का रिजल्ट अधूरा बताया गया, उसे विवि के गोपनीय विभाग ने कुछ महीने पहले पूरा बताकर छात्र को उत्तीर्ण दिखा दिया। मामला संज्ञान में आने पर बीयू प्रशासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में सत्यापन के नाम पर फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा है। बीयू प्रशासन ने 2018 से सत्यापन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगने शुरू कर दिए थे। इसके बावजूद बीयू में सत्यापन के नाम पर फर्जीवाड़ा थम नहीं रहा है। ताजा मामला विधि में प्रवेश लेने वाले एक छात्र का सामने आया है। छात्र ने करीब 24 साल पहले एलएलबी अंतिम वर्ष की परीक्षा दी थी। सूत्रों ने बताया कि छात्र के एक प्रश्नपत्र के नंबर चार्ट में नहीं चढ़े थे। ऐसे में उसका रिजल्ट अपूर्ण था। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से लगभग दो साल पहले छात्र की मार्कशीट का सत्यापन कराया गया तो बीयू ने रिपोर्ट में रिजल्ट अपूर्ण होने की बात लिखी। इसके बाद एक-दो बार और सत्यापन के लिए आवेदन आया तो छात्र से दस्तावेज मांगे गए।
बताया गया कि कुछ महीने पहले जारी की गई सत्यापन रिपोर्ट में छात्र को उत्तीर्ण बताया गया है। ये मामला बीयू प्रशासन के पास पहुंच गया है। परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर का कहना है कि प्रकरण की जांच के लिए उपकुलसचिव समेत दो प्रोफेसर की समिति बनाई गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पहले नहीं थे नंबर, बाद में चार्ट में चढ़ाए गए
झांसी। सूत्रों ने बताया कि छात्र का सत्यापन जब अपूर्ण लिखकर भेजा गया था, तब चार्ट में एक विषय में नंबर नहीं थे। मगर जब पास की सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई तो चार्ट में भी नंबर चढ़ गए। चूंकि, 2013-14 में तत्कालीन कुलपति प्रो. अविनाश चंद पांडेय ने चार्ट की स्कैनिंग करवाई थी। ऐसे में स्कैन चार्ट देखने से पूरे मामले की हकीकत सामने आ जाएगी।