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बीयू: फर्जी मार्कशीट बनाने में फंस गए आठ कर्मचारी

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने में आठ कर्मचारी फंस गए हैं। जांच में चार्ट में कटिंग करके फर्जी रिकॉर्ड चढ़ाने की पुष्टि हुई है। मामले में शामिल सबसे ज्यादा कर्मचारी गोपनीय और अभिलेख विभाग के हैं। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कुलपति ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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बीकेडी से एलएलबी करने वाले छात्र को 1998 में पास दिखाते हुए बीयू में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाई गई थी। सत्यापन के दौरान इस मामले को परीक्षा विभाग में तैनात एक अधिकारी ने पकड़ लिया था। बीयू प्रशासन तक मामला पहुंचा तो कुलपति ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी। जांच के बाद समिति ने कुलपति को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने करीब आठ कर्मचारियों को इस मामले में दोषी माना है। इसमें गोपनीय, अभिलेख और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक जिस छात्र की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनी है, उसका 2020 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने सत्यापन कराया था। तब छात्र का रिकॉर्ड बीयू ने उपलब्ध न होने की जानकारी भेज दी गई थी। इसके बाद कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी डुप्लीकेट मार्कशीट और डिग्री बन गई। दोबारा सत्यापन के लिए डिग्री और मार्कशीट आने पर ये मामला पकड़ में आ गया। जांच में समिति ने चार्ट में कटिंग करके संबंधित छात्र का रिकार्ड चढ़ाने की पुष्टि की है। जल्द ही कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
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अनुपस्थित छात्र की जगह चढ़ाया रिकॉर्ड
बीयू ने मामले की फोरेंसिक विभाग से भी जांच कराई। इसके बाद ही चार्ट में कटिंग से लेकर 1998 में अनुपस्थित विद्यार्थी की जगह संबंधित छात्र का रिकॉर्ड चढ़ाने का खुलासा हुआ। फर्जीवाड़ा करने वाले कर्मचारी द्वारा लिखा गया फॉन्ट अन्य छात्रों के रिकॉर्ड से मिलान न हो पाने की वजह से फर्जीवाड़ा खुल गया।
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समिति की रिपोर्ट मिल गई है। कई कर्मचारियों की संलिप्तता प्रतीत हो रही है। चार्ट में भी कटिंग की पुष्टि हुई है। कुलसचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। - प्रो. मुकेश पांडेय, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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