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Jhansi News: बीपी बढ़ा, नस फटी...50 लोगों की आंख में जमा खून का थक्का

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। सुबह उठे तो आंख के सफेद हिस्से में खून का थक्का जमा हुआ था। शुरु में लगा कि आंख मलने या किसी अन्य कारण से आंख लाल हो गई है। मगर जब डॉक्टर को दिखाया तब पता चला कि आंख की खून की नस फट चुकी है। दिसंबर में शहर के दो नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास ही ऐसे 50 केस पहुंच चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि रेटीना की खून की नस फट जाए तो आंख की रोशनी तक चली जाती है।
हाई ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ती बीमारी है। इसे हाइपरटेंशन भी कहा जाता है। इस पर ध्यान रखने की जरूरत है, क्योंकि ये शरीर के अंगों पर भी असर डालता है। इन दिनों बीपी बढ़ने की वजह से स्ट्रोक और हार्ट अटैक के मामले तो बढ़ ही गए हैं। साथ ही आंखों की खून की नस फटने के केसों में भी इजाफा हुआ है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शमी ने बताया कि खुजली होने पर ज्यादा रगड़ने से भी आंख की नस फट जाती है। मगर ठंड में ज्यादातर ये समस्या ब्लड प्रेशर बढ़ने से होती है। अगर कंजंक्टिवा (आंख का सफेद हिस्सा) की खून की नस फटे तो लालिमा और दर्द हो सकता है। मगर रेटीना की खून की नस फट जाए तो आंख की रोशनी तक चली जाती है। नस फटने के बाद कुछ ही मिनटों में आंख लाल हो जाती है। ये देखकर कई लोग घबरा भी जाते हैं। उन्होंने बताया कि सर्दियों में ठंड से बचाव के लिए लोग हीटर और ब्लोअर के आगे बैठे रहते हैं। ऐसे में आंखों में ड्राईनेस की समस्या बढ़ जाती है। इस वजह से भी आंखों में जलन शुरू हो जाती है। आंख तो तेज से रगड़ने पर भी खून की नस फट जाती है। दिसंबर में ऐसे 38 मरीज आ चुके हैं।
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वहीं, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय गुलाटी ने बताया कि इन दिनों आंखों की खून की नस फटने के मामले 25 फीसदी तक बढ़ गए हैं। खासकर जिन लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है। ठंड में शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए बीपी बढ़ता है। ऐसे में ब्लड प्रेशर के मरीजों की डोज भी बढ़ जाती है। अगर दवा खाने के बाद भी बीपी बढ़ा रहता है तो डॉक्टर से संपर्क करें। आंख की खून की नस फटने के दिसंबर में 12 केस आ चुके हैं।




इन बातों का रखें ध्यान
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- बीपी और शुगर की नियमित दवा खाएं
- 45 साल से अधिक उम्र के लोग नियमित बीपी, शुगर की जांच कराएं
- आंखों में खून का बड़ा धब्बा बन जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

- समस्या ठीक होने में दो-तीन हफ्ते लगते हैं, ऐसे में इलाज अधूरा न छोड़ें
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