झांसी। इस साल से अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का बोझ बढ़ गया है, क्योंकि किताबों के दाम 25 फीसदी तक बढ़ गए हैं। पुस्तक वितरकों का कहना है कि कागज महंगा होने से किताबों के दामों में वृद्धि की गई है।
इस बार किताबों का कंटेंट भी बदल गया है। हर विषय में कुछ न कुछ बदलाव हुआ है। पुस्तक वितरकों का कहना है कि किताबों के दामों में तीन साल बाद वृद्धि हुई है। कोरोना की वजह से पुस्तकों के दाम नहीं बढ़ाए जा सके। दूसरी तरफ, कागज की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। इसी वजह से पुस्तकों के दामों में 25 फीसदी तक इजाफा करना पड़ा है। अभिभावकों को अब कक्षा एक की किताब खरीदने के लिए 18.75 फीसदी रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। इसी तरह कक्षा दो की पुस्तकों में 18.39 फीसदी, कक्षा तीन में 23.02, चार में 19.96, पांचवीं में 23.19, छठवीं में 24.50, सातवीं में 24.82 और कक्षा आठ की किताबों में 24.90 फीसदी तक इजाफा हुआ है। ऐसे में नए सत्र से बच्चों को प्रवेश दिलाने वाले अभिभावकों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ गया है।
सीपरी बाजार, मिनर्वा, मानिक चौक और कोतवाली के आसपास कॉपी-किताबें बेचने वाले दुकानदारों की मानें तो हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अब ज्यादातर स्कूल चुनिंदा दुकानदारों के पास ही कॉपी-किताबें रखते हैं। कई बार कमीशन के चक्कर में दुकानदार कुछ रेट बढ़ाकर देते हैं। ऐसे में स्कूलवार किताबों पर बढ़ी महंगाई कम या ज्यादा भी हो सकती है।
कक्षावार बढ़ा खर्च
कक्षा 2022 2023
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एक 3200 3800
दो 3316 3926
तीन 3427 4216
चार 3716 4458
पांच 3828 4716
छह 3958 4928
सात 3972 4958
आठ 4016 5016
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(नोट : प्रकाशकों के अनुसार रेट घट-बढ़ सकते हैं।)
पुस्तकों की कीमतों में 25 फीसदी तक वृद्धि हुई है। इसके पीछे का कारण कागज महंगा होना है। कोरोना की वजह से तीन साल बाद पुस्तक के दाम बढ़े हैं। - उमेश अग्रवाल, पुस्तक वितरक।