अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अमर उजाला की ओर से चलाई जा रही मुहिम ‘स्मार्ट सिटी : 10 साल ये हाल’ के तहत बुधवार को संवाद आयोजित किया गया। पार्षदों और समाज के अन्य वर्गों के लोगों ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत महानगर के विकास के कई काम तो हुए हैं, लेकिन शहर की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया। आमजन को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सीधा लाभ नहीं मिल पाया है। जबकि, इसके तहत जारी किए गए भारी भरकम बजट से महानगर की व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन किया जा सकता था।
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में पार्षद उमेश जोशी ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना महानगर के तीन-चार वार्डों तक ही सिमट कर रह गई है। बाकी सभी वार्ड इस योजना के तहत होने वाले विकास कार्यों से अछूते हैं। पार्षद हरिमोहन मिश्रा ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत झांसी को 930 करोड़ रुपये की धनराशि मिली थी। इस बजट का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए किया जा सकता था। हर वार्ड में अस्पताल बनाया जा सकता था। लेकिन, इस दिशा में सोचा भी नहीं गया।
पार्षद राहुल कुशवाहा ने कहा कि उनके वार्ड में गल्ला मंडी के पास स्मार्ट रोड बनाई गई है, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया। थोड़ी सी बारिश में ही जल भराव हो जाता है। पार्षद लखन कुशवाहा ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत आंतियाताल के सुंदरीकरण के नाम पर पैसे की बर्बादी की गई है। और तो और अब तो सड़क से ताल नजर ही नहीं आता है। उसके आगे दुकानें खड़ी कर दी गईं, जबकि पहले तालाब बेहतर स्थिति में था।
पार्षद प्रदीप खटीक ने कहा कि प्राचीन दरवाजों के जीर्णोद्धार के नाम पर लीपापोती की गई है। परकोटे की ओर तो ध्यान ही नहीं दिया गया, जबकि यह इतिहास की अनूठी विरासत है।
आईटीआई निवासी वीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि उनके इलाके में पाइप लाइन तो डाल दी गई, परंतु पानी अब तक नहीं पहुंचा। बिजली आपूर्ति और साफ-सफाई की स्थिति भी बदतर है। उनके क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के तहत कोई भी काम नहीं हुआ। उमेश दुबे ने कहा कि महानगर की बस्तियों में खाली प्लॉट कचरा घर में तब्दील हो चुके हैं। आसपास रहने वालों को खासी दिक्कत होती है।
बीकेडी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मानसिंह यादव ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत आईटीआई क्षेत्र में दो साल पहले योग शेड बनाया गया था, जो शुरुआत से ही किसी काम का नहीं रहा। बारिश में उसकी छत टपकने लगती है और उसमें लाइट भी नहीं है। उद्योग व्यापार मंडल की युवा शाखा के प्रांतीय अध्यक्ष जितेंद्र सोनी ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन बाजारों में सुधार का कोई काम नहीं किया गया। बाजार जाम, अतिक्रमण, गंदगी, पार्किंग आदि समस्याओं से पहले की तरह जूझ रहे हैं।
पार्षद कन्हैया कपूर ने कहा कि जनता की जरूरतों पर कतई ध्यान नहीं दिया गया। स्मार्ट सिटी के तहत मिले बजट को अफसरों ने मनमाने ढंग से खर्च किया। पार्षद अंकित सहारिया ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत कई कार्य तो बहुत अच्छे हुए, लेकिन यदि इसमें सभी वार्डों को शामिल किया जाता तो झांसी की तस्वीर कुछ और होती।
पार्षद सुशीला दुबे ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम में शामिल नए वार्डों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए था। लेकिन, इस योजना के तहत हुए कार्य नगर के कुछ हिस्सों तक सिमट कर रह गए।
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संवाद में ये मुद्दे भी उठे...
- नगर निगम क्षेत्र में सीवरेज लाइन बनाई जानी चाहिए। जबकि, कैंट बोर्ड क्षेत्र में इसका काम जारी है।
- बिजली के तार जगह-जगह झूल रहे हैं। तारों के गुच्छे भी नजर आते हैं। तारों को अंडरग्राउंड किया जाना चाहिए।
- डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम पहले नगर निगम 40 लाख में करता था। लेकिन, स्मार्ट सिटी से यह काम पौने दो करोड़ रुपये में किया जाता है। इसका बोझ अब नगर निगम पर डाल दिया गया है, इसमें पैसा खर्च हो जाने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
- शहर में बनाई गई ओपन जिम की देखरेख नहीं हो रही है, जिससे इनकी हालत खराब होती जा रही है। कहीं भी इंस्ट्रक्टर तैनात नहीं किए गए हैं।
- महानगर की सड़कें चौड़ी और नालियां अंडरग्राउंड बनाई जाएं।
- जल निकासी की समुचित व्यवस्था हो, जिससे जलभराव न हो।
- लक्ष्मीताल और आंतियाताल के सुंदरीकरण जल्द पूरा किया जाए।