शहर में निर्मित अधिकांश शोरूम के बेसमेंटों को पार्किंग की जगह व्यवसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके चलते शहर के अधिकांश इलाकों में हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। मेडिकल कॉलेज स्थित एक के बाद एक निजी अस्पतालों में भी बेसमेंटों में अस्पताल की गतिविधियों को संचालित किया जा रहा है। कई बार शिकायतें भी की गई हैं। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। छह महीने पहले सरकार ने जेडीए को शहर के सभी बेसमेंटों को चिह्नित कर कार्रवाई करने आदेश जारी किए थे। आदेश पर प्राधिकरण के सचिव की अगुवाई में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति का गठन होते ही शहर के सभी बेसमेंटों की सूची को तैयार कर की। लेकिन आज तक एक भी बेसमेंट के स्वामी पर कार्रवाई नही की गई है। जिसके चलते जेडीए अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि सरकारी आदेश के अनुसार सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति द्वारा व्यवसायिक गतिविधियों को संचालित करने वाली इमारतों को चिह्नित किया था। लॉकडाउन होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी थी। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।