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Jhansi News: बास्केटबॉल कोर्ट में आठ साल से ताला... खिलाड़ी दर-बदर, मैदान बना कचरा घर

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झांसी। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम प्रबंधन की अनदेखी के चलते परिसर में बना बास्केटबॉल कोर्ट बदहाली की मार झेल रहा है। हालात ये हैं कि आठ सालों से यहां ताला बंद है। आसपास के लोग बास्केटबॉल कोर्ट में कचरा डालने लगे हैं। इससे खिलाड़ी जहां खेलने के लिए दर-बदर भटक रहे हैं वहीं, मैदान कचरा घर जैसा नजर आने लगा है।
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झांसी में बास्केटबॉल खेल को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को इसका अभ्यास कराने के लिए मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में तकरीबन 10 साल पहले वर्ष 2012 में बास्केटबॉल कोर्ट का निर्माण कराया गया था। शुरूआती दौर में कोच रखकर खिलाड़ियों को रोजाना अभ्यास भी कराया जाता था। लेकिन दो साल बीतने के बाद स्टेडियम प्रबंधन द्वारा कोच की सेवाओं को समाप्त कर बास्केटबॉल कोर्ट में ताला जड़ दिया गया। इसके चलते बास्केटबॉल के खिलाड़ियों के अभ्यास पर भी विराम लग गया।
किसी भी खिलाड़ी को यहां अभ्यास करने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में जो खिलाड़ी सक्षम थे वे स्टेडियम में बास्केटबॉल कोर्ट बंद होने से अभ्यास के लिए निजी संस्थानों में चले गए। लेकिन, जिन खिलाड़ियों के पास अच्छे संसाधन नहीं थे वे अभ्यास के लिए यहां-वहां भटकने को मजबूर हो गए।
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इन आठ सालों में खिलाड़ियों और कोचों द्वारा मेजर ध्यानचंद स्टेडियम प्रबंधन से कई बार बास्केटबॉल कोर्ट को दोबारा से शुरू करने की मांग की गई। लेकिन स्टेडियम प्रबंधन ने इसे अनसुना कर दिया है। वर्तमान में कोर्ट की हालत कुछ ऐसी है कि मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ है। आसपास के लोग यहां कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं। स्टेडियम में दूसरे खेल खेलने आ रहे खिलाड़ी भी खाना खाकर प्लेटें और गिलास बास्केटबॉल के मैदान व इसकी सीढ़ियों पर फेंक रहे हैं। देखने में अब यह कचरा घर जैसा नजर आने लगा है। उधर, शहर में बास्केटबॉल के तकरीबन 250 खिलाड़ी हैं।
इस संबंध में स्टेडियम के प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर का कहना है कि मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में बास्केटबॉल का कैंप नहीं है। जिसके चलते कोच भी नहीं रखा गया है।
खिलाड़ियों के साथ तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में कुछ ही खेलों को बढ़ावा दिया जाता है। बाकी खेलों को बंद कर खिलाड़ियों को स्टेडियम में आने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
अशीत बनर्जी, सचिव, जिला बास्केटबॉल संघ
स्टेडियम के बास्केटबॉल में तालाबंदी होेने के कारण खिलाड़ी अभ्यास करने से वंचित हैं। अभ्यास नहीं होने के कारण सालों बीत जाने के बाद भी कोई खिलाड़ी राज्य एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग तक नहीं कर सका है।
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मोहम्मद नईम मंसूरी, बास्केटबॉल कोच
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