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चुनावी सीजन आते ही पार्षदों को याद आया विकास

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झांसी। नगर निगम सदन का कार्यकाल अब चंद महीने ही शेष बचा। ऐसे में पार्षदों को अब अपने-अपने इलाकों में विकास की याद सताने लगी है। पिछले करीब एक माह के भीतर पार्षदों ने विकास कार्य संबंधी करीब 339 प्रस्ताव जनकार्य विभाग को दिए हैं। वहीं, खस्ता माली हालत से जूझ रहे निगम प्रशासन को अब यह नहीं सूझ रहा कि इतनी बड़ी संख्या में प्रस्तावित निर्माण कार्य किस फंड से कराए जाएं।
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नगर निगम सदन का कार्यकाल अब करीब तीन माह ही शेष बचा। ऐसे में अधिकांश पार्षदों ने अपने-अपने वार्ड में काम कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। रोजाना ही पार्षद अपने वार्ड संबंधी फाइल तैयार करके नगर निगम पहुंच रहे हैं। निगम अफसरों के मुताबिक प्रत्येक पार्षद ने औसतन आठ-दस कार्य प्रस्तावित किए हैं। इस समय सिर्फ जनकार्य विभाग में ही 550 से अधिक कार्य प्रस्तावित हैं जबकि 339 कार्य पार्षदों ने पिछले एक माह के दौरान ही भेजे हैं। पार्षदों के प्रस्तावित कार्य कराने में ही करीब 100 करोड़ की जरूरत होगी जबकि इन कार्यों के लिए नगर निगम का सलाना बजट ही कुल 24 करोड़ रुपये का है। निगम अफसरों के मुताबिक इसमें सामान्य फंड में 23 करोड़ एवं नगरीय अवस्थापना निधि में एक करोड़ रुपए हैं। इन्हीं पैसों से सड़क, गली, नाली समेत अन्य निर्माण कार्य कराए जा सकते हैं। पार्षदों की सबसे अधिक मांग इन्हीं कार्यों की है। निगम अफसरों के सामने बजट का इंतजाम करने की समस्या पैदा हो गई है। वहीं, पार्षद बजट की कमी की बात सुनने को राजी नहीं। महापौर से लेकर नगर आयुक्त तक पर अपने काम के लिए दबाव बनाने में जुटे हैं। वहीं, महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है आवश्यकता वाले सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएंगे।
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