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ललितपुर के जंगलों में फिर खोज करेगा पुरातत्व विभाग

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ललितपुर के जंगलों में एक बार फिर पुरातत्व विभाग खोज शुरू करेगा। विभाग का मानना है कि पांडव वन, दुधई, लखनंजर, देवगढ़ के जंगलों में कई दुर्लभ प्राचीन स्मारक और आदि मानव सभ्यता काल के व्यापक अवशेष मौजूद हैं। ऐसे में वन विभाग की मदद से इस वर्ष फिर खोज अभियान शुरू होगा। उल्लेखनीय है कि पांडव वन की गुफाओं में बेहद प्राचीन भित्ती चित्र बने हुए हैं। साथ ही दुधई के जंगलों में पहाड़ों पर भगवान नरसिंह की तरह अन्य विशाल प्रतिमाएं भी प्राप्त होने की संभावना है। प्राकृतिक खूबसूरती से भरे ललितपुर में देवगढ़ का दश अवतार मंदिर, जैन मंदिरों का समूह, बौद्ध गुफाएं, दुधई के सूर्य व शिव मंदिर, पहाड़ पर बनी नरसिंह प्रतिमा, रणछोड़ मंदिर सहित कई महत्वपूर्ण प्राचीन स्मारक हैं। इनमें अधिकांश स्मारक जंगलों में हैं, जिन्हें देखने के लिए देश - विदेश से काफी सैलानी आते हैं। पुरातत्व विभाग का कहना है कि ललितपुर में अभी तक पाषाण काल के औजार मिले हैं। पांडव वन की गुफाओं में बेहद प्राचीन चित्र प्राप्त हुए हैं। संभावना है कि ललितपुर के जंगलों में खासकर बेतवा, जामुनी नदी क ी घाटी में आदि मानव के विकास को लेकर शोध होगा। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे के अनुसार विभाग की पांच सदस्यीय टीम खोज कार्य में जुटेगी। इसमें वन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। बाक्स बेतवा नदी था प्रमुख जलमार्ग ललितपुर में वैष्णव, जैन, शिव, शाक्त और बौद्ध संप्रदाय के कई प्राचीन स्मारक पुरातत्व विभाग को प्राप्त हुए हैं। विभाग का मानना है कि देश के प्रमुख जलमार्गों में बेतवा नदी का भी उपयोग किया जाता था। इसके अलावा लगभग पांच वर्ष पूर्व देवगढ़ के जंगल में बौद्ध गुफा खोजी गई थी, जो आज सरकारी संरक्षण में है।
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