झांसी। बेशकीमती सरकारी जमीन पर 14 साल पहले एक निजी व्यक्ति की बंजर जमीन के नंबर चढ़ा दिए गए थे। जबकि, बंजर जमीन को सरकार के नाम दर्ज कर दिया गया था। शिकायत के बाद हुई जांच में इसका खुलासा हुआ है। अब प्रशासन की ओर से सरकारी जमीन पर वापस पुराने नंबर दर्ज कराने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
सदर तहसील के मौजा दिगारा में जमीन कारोबारी व राजस्व विभाग की सांठगांठ से जमीन का बड़ा घोटाला हुआ था। झांसी कानपुर-हाईवे से सटी कीमती लगभग ढाई हेक्टेअर जमीन पर एक कारोबारी की निजी जमीन के नंबर चढ़ा दिए गए थे। जबकि, सरकारी जमीन के नंबर कारोबारी की सड़क से काफी अंदर की बंजर जमीन पर दर्ज कर दिए गए थे। हालांकि, सालों यह मामला सरकारी फाइलों में दफन रहा। हाल ही में इसका खुलासा हुआ है। कारोबारी द्वारा जमीन पर प्लॉटिंग शुरू की गई तो इसकी शिकायतें आने लगीं। इस पर राजस्व विभाग द्वारा जांच की गई तो जमीन के नंबरों की अदला-बदली कर घोटाले को अंजाम देने का मामला सामने आया। जबकि, नंबरों की अदला बदली कर विशेष परिस्थितियों में ही निजी भूमि से सरकारी भूमि बदलने का प्रावधान है। इसमें भी शर्त यह रहती है कि दोनों जमीनों के क्षेत्रफल में 20 प्रतिशत से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। साथ ही जमीन की कीमतों में भी 10 प्रतिशत से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। मामले का खुलासा होने के बाद अब सड़क किनारे की सरकारी जमीन पर एक बार फिर से पुराने नंबर चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए राजस्व विभाग की ओर से वाद दायर किया गया है।
नंबरों की अदला-बदली कर सरकारी भूमि को निजी में बदलने का मामला सामने आया है। लेकिन, अब दुबारा से सरकारी भूमि पर पुराने नंबर चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में सक्षम न्यायालय में वाद दायर किया गया है।
- डा. लालकृष्ण, तहसीलदार सदर