झांसी। स्कूली बस और वैन का किराया भी 20 फीसदी तक बढ़ गया है। इससे अभिभावकों पर चौतरफा बोझ बढ़ा है। क्योंकि, किताबों से लेकर स्कूली ड्रेस तक की कीमतें तो पहले ही बढ़ चुकी हैं। ऐसे में कई परिजनों ने तो बच्चों का स्कूली वाहन हटाने तक का फैसला कर लिया है।
हाल फिलहाल न तो पेट्रोल और न ही डीजल के दाम बढ़े हैं। मगर निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को घर से स्कूल लाने और फिर स्कूल से घर छोड़ने के लिए लगे वाहनों का किराया बढ़ा दिया गया है। किराया में भी कोई पांच या दस प्रतिशत नहीं, बल्कि 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। किसी का एक, किसी के दो तो किसी के तीन बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। ऐसे में अभिभावकों पर दो सौ रुपये से लेकर छह सौ रुपये तक का बोझ हर महीने बढ़ गया है। इससे पहले स्कूल 27.5 प्रतिशत तक फीस भी बढ़ा चुके हैं। वहीं, किताबों की कीमतें भी 25 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं। यही नहीं, ड्रेस की कीमतें भी 150 से 200 रुपये तक बढ़ चुकी है। स्कूलों ने अपने यहां की ड्रेस भी बदल दी है। लगातार महंगी होती बच्चों की पढ़ाई से अभिभावक बहुत परेशान हैं।
सिर्फ आदेश जारी करना काफी नहीं, अभियान चले
शिक्षा विभाग की तरफ से हाल ही में स्कूलों को एक आदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी छात्र को किसी खास दुकान से स्कूली सामान, किताबें खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। साथ ही पांच सालों के भीतर ड्रेस न बदली जाए। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा सिर्फ आदेश जारी करना काफी नहीं है। विभाग को अभियान चलाकर मनमानी करने वाले स्कूलों को चिह्नित करके कार्रवाई करनी चाहिए।
ये बोले अभिभावक
स्कूली वाहन का किराया इस बार 20 फीसदी तक बढ़ गया है। पिछले साल तक जहां स्कूली वाहन की 900 रुपये फीस ली जाती थी, इस बार 1100 रुपये प्रतिमाह देने पड़ रहे हैं। - प्रवीण सिंह, सीपरी बाजार।
फीस से लेकर किताबों के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं। अब स्कूली वाहनों का भी किराया बढ़ गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूलों की मनमानी पर रोक लगानी चाहिए। - इमरान खान, जीवनशाह।