कई कड़े कानून के बाद भी सस्ती मजदूरी के चक्कर में लगाते हैं काम पर
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। हम लोग अक्सर चाय की दुकान में छोटे-छोटे बच्चों को ग्राहकों को चाय के गिलास पकड़ाते या जूठे बर्तन धोते देखते हैं या कहीं छोटू-चवन्नी थाली लाना पुकारते ग्राहकों को रेस्टोरेंट में खाने की थाली सर्व करते देखा होगा, कई बार कुछ लोग गाली देकर भी बुलाते हैं, मालिक की एक आवाज पर दौड़ते भागते काम करते इन बच्चों का कोई नाम तक नहीं जानता। अपनी मर्जी से कोई छोटू या चवन्नी कहकर बुलाता है तो कोई इन्हें कुछ और नाम दे देता है। इनमें ज्यादातर बच्चे ऐसे होते हैं, जो अक्सर अपने परिवार की बुरी माली हालत देखकर बचपन में ही काम करने को मजबूर हो जाते हैं। अधिवक्ताओं ने बाल श्रम को लेकर सामाजिक व कानूनी अपराध बताया है, उन्होंने बताया कि कानून में इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लग रही है। इसके व्यापक जागरुकता अभियान की आवश्यकता है जिससे बच्चों का बचपन नष्ट न हो सके।
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जनपद में कई बार रेस्क्यू के दौरान नाबालिग बच्चों को बरामद किया है, ऐसा पाया जाता है कि बालश्रम के कारण बच्चों का विकास रुक जाता है और बच्चे गलत राह पर चले जाते हैं, इसका मुख्य कारण अशिक्षा और गरीबी है, कई मामलों में ऐसा पाया जाता है कि पिता अपने शौक पूरे करने के लिए बच्चों से बालमजदूरी कराते हैं। हम लोग लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाल श्रमिकों को आजाद कराकर जागरुकता फैला रहे हैं।
- अर्चना सक्सेना एडवोकेट, सदस्य बाल कल्याण समिति।
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एक अनुसंधान के मुताबिक भारत में बाल श्रमिकों की संख्या 1 करोड़ 70 लाख है। भारत में बाल श्रम के खिलाफ महत्वपूर्ण कानूनों में भारतीय दंड संहिता 1860, बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976, बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986, किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2000 शामिल हैं, इन सब कानूनों के होने के बाद भी बाल श्रम जारी है जो सरकारी एजेंसियों की उदासीनता को प्रदर्शित करती है।
- अभिषेक जैन अधिवक्ता।
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भारत के संविधान में मूल अधिकारों के अनुच्छेद 24 के तहत भारत में बाल श्रम पर पाबंदी लगाई गई है, नियोक्ता 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी कार्य पर लगाता है तो ऐसा करने पर उसे दो साल तक की कैद की सजा या जुर्माना या सजा और अधिकतम 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह कानून फिल्मों, विज्ञापनों और टीवी उद्योग में बच्चों के काम करने पर लागू नहीं होता। अगर 14 से 18 की उम्र वालों से काम लिया जाता है तब, लेकिन काम की समय सीमा तय और रजिस्टर मेंटेन के साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी बातों का ध्यान देना आवश्यक है, ऐसा न करने पर एक माह तक की जेल और साथ ही 10 से लेकर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ेगा।
रविंद्र प्रताप, अधिवक्ता।
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अपनी अनुसंधान पुस्तक चाइल्ड लैबरिंग - साइलेंट फीचर विथ फैक्ट एंड लॉ के पेज नंबर 3 पर लिखते हैं कि हमारे देश के सैकड़ों मंदिरों में बालरूप राम, कृष्ण, हनुमान, गणेश की पूजा होती है, कहते हैं कि बच्चे भगवान का अंश होते हैं, हमारा देश ध्रुव, प्रह्लाद, लव कुश और अभिमन्यु की बुद्धिमत्ता के लिए जाना जाता है, लेकिन समय का दुर्भाग्य देखिए हर छठवां बच्चा बाल श्रम के अभिशाप से पीड़ित है। कानूनों के साथ साथ बाल श्रम को सामाजिक जागरुकता और निशुल्क शिक्षा व्यवस्था से ही दूर किया जा सकता है।
पुष्पेंद्र सिंह चौहान, पैनल अधिवक्ता।