झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में स्पीड ब्रीडिंग अनुसंधान सुविधा की स्थापना की गई। अब परंपरागत रूप से नौ से 10 सालों में विकसित होने वाली फसल प्रजातियां छह-सात साल में तैयार की जा सकेंगी। इसका उद्देश्य किसानों को कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की उन्नत किस्में उपलब्ध कराना है। निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि स्पीड ब्रीडिंग सुविधा में फसलों को कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के तहत लंबे समय तक प्रकाश दिया जाता है। इससे चना, कठिया गेहूं, जौ आदि फसलें सिर्फ 70 से 75 दिन में तैयार हो जाती हैं। इससे तेजी से नई प्रजातियां विकसित करने का अवसर मिलता है। खासतौर से मूंगफली जैसी तिलहनी फसल जो बुंदेलखंड के किसानों की प्रमुख आय का स्त्रोत है, उसके लिए यह तकनीक वरदान साबित होगी। वहीं, कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने स्पीड ब्रीडिंग लैब को देखा। कहा कि इस अत्याधुनिक सुविधा से बुंदेलखंड में खेती की उत्पादकता में सुधार होगा। इस दौरान डॉ. आरके सिंह, डॉ. जितेंद्र तिवारी, डॉ. मनीष श्रीवास्तव, डॉ. रूमाना खान, डॉ. राकेश चौधरी आदि मौजूद रहे। ब्यूरो