झांसी। चौधरी चरण सिंह लखेरी बांध के पुर्नवास प्रक्रिया को गहरा झटका लगा है। शासन ने सिंचाई विभाग के 35 करोड़ के पुनर्वास प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। शासन के रवैये से मुआवजे की उम्मीद कर रहे 250 परिवारों को मायूसी हाथ लगी है। वहीं, सिंचाई विभाग के अफसर भी पशोपेश में फंस गए हैं। मुआवजे की मांग को लेकर पिछले दो महीने से दर्जनों किसान बेतवा भवन में धरने पर बैठे हैं।
पिछले करीब आठ साल से लखेरी बांध के पुर्नवास का मामला विवादित है। मऊरानीपुर के लखेरी गांव में वर्ष 2008 में नहर एवं डैम निर्माण कार्य पूरा हो गया लेकिन, पूरे गांव खाली न होने से यह बांध आज तक पूरी क्षमता के मुताबिक नहीं भरे जा सके हैं। बांध के लिए महेबा, किशोरपुरा, दुबारा, चिरौरा, तुर्क लहचूरा, कुटौरा, रेवन, बछेरा एवं बुढाई को डूब इलाके में शामिल किया गया था। अन्य गांव तो खाली करा लिए गए लेकिन, रेवन और बुढ़ाई गांव में ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया।
उनको जिस तिथि में मुआवजा दिया गया, उस समय परिवार के अन्य सदस्य बालिग हो गए। लिहाजा अब उनको भी मुआवजा राशि दी जानी चाहिए लेकिन, सिंचाई विभाग इसके लिए राजी नहीं हुआ। प्रशासन की दखल के बाद मंडलायुक्त ने एक कमेटी बनाई। कमेटी ने वर्ष 2013 की पुनर्वास नीति के आधार पर 250 परिवार के बीच 35 करोड़ का मुआवजा देने की बात कही। यह रिपोर्ट मंडलायुक्त की ओर से शासन को भेजी गई लेकिन, कुछ दिनों पहले शासन ने कमेटी की इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इस रकम को देने से भी इन्कार कर दिया। शासन के इस रवैये से अब यह मामला फंस गया। एक्सईएन पंचम सिद्घार्थ सिंह का कहना है कि शासन के नामंजूर करने के बाद अब नए विकल्प पर विचार किया जा रहा है।