नगर निगम में गृहकर जमा करने वालों के लिए 12 फीसद का ब्याज परेशानी का सबब बन रहा है। छह दिन की देरी के चलते हो रही ब्याज की वसूली की प्रक्रिया के चलते करदाता ब्याज को माफ करने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि छह दिन की देरी के चलते कर नहीं जमा करने वालों से ब्याज की वसूली न की जाए। दरअसल, नगर निगम में स्वकर प्रणाली लागू की गई है। इससे नगर निगम को हर साल करीब 16 करोड़ रुपये की आय होती है। नगर निगम का कैश काउंटर लॉकडाउन के चलते 25 मार्च से बंद कर दिया गया था। इस दौरान तमाम करदाता गृहकर जमा करने से वंचित रह गए। अब अनलॉक 1 के बाद एक जून से गृहकर जमा करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें निगम के कैश काउंटर पर करीब 30 लोग रोज कर जमा करने पहुंच रहे हैं। बताया जाता है कि कर जमा करने के दौरान लोगों से 12 फीसद के हिसाब से ब्याज लिया जा रहा है। इसके चलते लोगों की दिक्कत बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते पहले ही आर्थिक स्थिति तंग है। ऐसे में ब्याज की वसूली से दिक्कत बढ़ रही है। निगम को छह दिन की देरी के चलते ब्याज नहीं लेनी चाहिए। मांग करने वालों में उमेश कुमार, राजेश सिंह, अनोखे लाल, विश्वजीत, असलम समेत तमाम लोग शामिल हैं। अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बताया कि ब्याज की वसूली शासन के निर्देशों के आधार पर होती है। ब्याज कोई विलंब दंड के तौर पर नहीं ली जा रही है। 25 मार्च से ही गृहकर बंद हुआ है। लोग बीते वित्तीय वर्ष का कर पहले जमा कर देते तो ब्याज नहीं लगता। निगम की सदन में मामला रखा जाएगा। अगर सदन छूट देने का प्रस्ताव पारित करेगा, तो आगे कार्रवाई की जाएगी।