जौनपुर। मुहर्रम की सातवीं तारीख पर नगर में बृहस्पतिवार को जगह-जगह जुलूस निकाला गया। मुहर्रम के महीने में मछलीशहर नगर के खानजादा मोहल्ला स्थित जरी इमामबाड़ा खोल दिया गया है। यहां रखे सोने का ताजिया देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंच रहे हैं।
मछलीशहर : जरी इमामबाड़ा में रखे सोने के ताजिये की पूरे देश में साख है। इमामबाड़े में सोने के अक्षर वाली दुर्लभ कुरान भी मौजूद है। वर्तमान में इमामबाड़ा की देखरेख करने वाले हैदर इकबाल रिजवी बताते है कि 1857 की गदर के समय लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह ने इस स्वर्ण जड़ित ताजिये को अंग्रेजों की नजर से बचाकर एक बड़े ताबूत में भरकर गोमती नदी में प्रवाहित कर दिया। इसे प्रतापगढ़ जिले में डिप्टी कलेक्टर पद पर कार्यरत स्थानीय नगर निवासी अली जामिन जैदी ने नदी से पाया तो उसे लाकर इमामबाड़ा में रखा। तब से आज तक यह यहां की शोभा बढ़ा रहा है। स्वर्ण जड़ित ताजिये को देखने के लिए हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग पहुंचते हैं। इसके मुतवल्ली के रूप में कमर रजा कार्य संभाल रहे हैं। जबकि स्थानीय तौर पर हैदर इकबाल रिजवी देखरेख करते हैं। शाहगंज: मोहर्रम की सातवीं तारीख पर नगर में बृहस्पतिवार की शाम चार बजे अंजुमन हैदरी नई आबादी की अगुवाई में जुलूस निकाला गया। जुलूस सेंट थामस रोड नई आबादी से प्रारंभ होकर तहसील मुख्यालय, रोडवेज, रेलवे स्टेशन, पुरुष अस्पताल, जेसीज चौक व भठियारी सराय से होता हुआ शाहपंजा पहुंचा। जहां मातम के साथ इसका समापन हुआ। जुलूस में अकीदतमंदों ने नौहा-ख्वानी व मातम करते हुए कर्बला के शहीदों को याद किया। इमाम हुसैन की शहादत को समर्पित इस जुलूस में श्रद्धालु गहरे गम में डूबे नजर आए। नौहा व मातम पेश करने वालों में साहबे ब्यास, जनम और दानिश की प्रमुख भूमिका रही। जुलूस के दौरान अंजुमन हैदरी के इंतजार हुसैन अली अहमद उर्फ बच्चा, अशफाक अली उर्फ पप्पू, नसीम हैदर, बादल, गुफरान अहमद ने सहयोग किया।
गौराबादशाहपुर : बमैला में बृहस्पतिवार को एक मजलिस सैयद मेहदी हसन रिजवी के इमामबाड़े में हुई। इसको मौलाना ने खिताब फरमाया। मजलिस के बाद मेहदी का जुलूस निकाला गया। इस मौके पर तौकीर हसन, रजा मेहदी, अफसर हुसैन, मो.रजा, परवेज हसन, हसन रजा, हसन अब्बास, सैयद हसन आदि उपस्थित रहे।