मछलीशहर। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंतोत्सव मनाया जाता है। यह पावन पर्व बुधवार को रेवती नक्षत्र और शुभ योग में पड़ रहा है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पूरे जिले के शिक्षण संस्थानों, घरों, मंदिरों और पंडालों में विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना की जाएगी। मंगलवार को इसकी तैयारियां देर शाम तक चलती रहीं। ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल ने बताया कि इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहन कर सरस्वती मां की पूजा करने का विधान है। वसंत पंचमी को कोई भी काम करने के लिए शुभ मुहूर्त की जरूरत नहीं होती है। विद्यारंभ, नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह प्रवेश के लिए वसंत पंचमी को उत्तम माना गया है। यह प्रकृति का उत्सव है। सरस्वती पूजन का उद्देश्य जीवन में अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न करना है। मां सरस्वती के साथ भगवान गणेश, सूर्यदेव, भगवान विष्णु व शिव की भी पूजा की जाती हैं। श्वेत फूल-माला के साथ माता को सिंदूर व अन्य शृंगार की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। वसंत पंचमी के दिन माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित करने का विधान है। प्रसाद में मां को पीले रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है। ''''ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः'''' का जप किया जाता है। लोग बच्चों को इस दिन विद्या अध्ययन प्रारंभ करवाते हैं, ऐसा करने से बुद्धि कुशाग्र होती है और मां की कृपा सदैव बनी रहती है।