जौनपुर। लॉक डाउन के चलते कार्यालय व दुकानें बंद होने से मार्च क्लोजिंग अधर में पड़ गया है। मार्च समाप्त होने में मात्र चार दिन शेष हैं, लेकिन अभी भी अधिकांश विभाग अपने बिल पेश नहीं कर पाए हैं। जरूरी दस्तावेजों के अभाव में बिल अधूरा है। सबसे ज्यादा मुश्किल में स्वास्थ्य, पीडब्लूडी, आरईएस, समाज कल्याण सहित अन्य विभाग हैं। तय समय तक बजट का उपभोग न दर्शाने पर उन्हें अवशेष बजट सरेंडर करना पड़ेगा।
कोराना के कारण लॉक डाउन होने से इस समय अधिकारी व कर्मचारी अपने आवास पर रहे रहे हैं। सरकार ने उन्हें कार्यालय न आने की छूट दी हैं। ज्यादातर कर्मचारी व अधिकारी आवास से ही विभागीय कामों को निपटा रहे हैं। उधर, वर्तमान वित्तीय वर्ष का क्लोजिंग भी 31 मार्च तक होना हैं। क्लोजर रिकार्ड में उन्हें पूरे सत्र में विभिन्न मदों से मिले बजट और उसके बदले खर्च का पूरा ब्योरा दर्शाना जरुरी है। समय से यह कार्य पूरा हो सके, इसके लिए सभी विभागों को 25 मार्च तक ही अपने बिल कोषागार में पेश करने का निर्देश दिया गया था। लॉक डाउन के कारण अधिकांश विभाग अपना बिल पेश नहीं कर पाए हैं। लाभार्थी योजनाओं का संचालन करने वाले विभागों में आवेदकों का सत्यापन पूरा न हो पाने के कारण खाते में धनराशि भेजने की प्रक्रिया अटकी हुई है, वहीं कार्यदाई संस्थाएं काम ठप होने के कारण कुछ कर पाने में बेबस बनी हुई हैं। कई विभागों को वर्ष में हुई खरीद के बिलों की भी जरुरत है, मगर दुकानें बंद होने से यह बिल उन्हें नहीं मिल पा रही। स्वास्थ्य, बाल विकास, पीडब्लूडी, डीपीआरओ, आरईएस सहित कई विभागों के समक्ष विकट स्थिति है। अगर समय सीमा नहीं बढ़ी तो इन्हें करोड़ों की राशि सरेंडर करने की मजबूरी होगी।