करंजाकला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करतीं महिला आयोग की सदस्य गीता बिंद। संवाद
करंजाकला। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करंजाकला में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत बुधवार को राज्य महिला आयोग की सदस्य गीता बिंद के निरीक्षण में सामने आ गई। साफ-सफाई में लापरवाही और व्यवस्थाओं में खामियां मिलने पर उन्होंने पीएचसी प्रभारी को फटकार लगाई। निर्देश दिया कि मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करें। अस्पताल की स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। महिला आयोग की सदस्य सबसे पहले ब्लड लैब पहुंचीं। वहां उन्होंने रजिस्टर की जांच की और लैब टेक्नीशियन से एक महीने में हुए ब्लड टेस्ट की जानकारी ली। रजिस्टर के अनुसार एक महीने में 30 ब्लड टेस्ट और तीन गर्भवती महिलाओं की जांच की गई थी। इसके बाद उन्होंने टीबी यूनिट का निरीक्षण कर रजिस्टर देखा। टीबी यूनिट प्रभारी प्रमोद यादव ने बताया कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति ने 75 महिलाओं को गोद लिया है। निरीक्षण के दौरान महिला आयोग की सदस्य एक्स-रे रूम भी पहुंचीं। यहां रजिस्टर की जांच के बाद एक्स-रे टेक्नीशियन ने जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने औषधि कक्ष का निरीक्षण किया, जहां फार्मासिस्ट सत्यलाल यादव से दवाओं की उपलब्धता, वितरण और रखरखाव के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने मरीजों से भी बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि किसी मरीज ने खुलकर शिकायत नहीं की। निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर स्थिति डिलीवरी रूम में देखने को मिली। यहां बेड पर गंदे और अस्त-व्यस्त चादरें देखकर महिला आयोग की सदस्य भड़क गईं। उन्होंने पीएचसी प्रभारी डॉ. संतोष जायसवाल को से नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या इसी तरह के गंदे चादर मरीजों को दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में इस तरह की लापरवाही किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने वार्ड, डिलीवरी रूम, शौचालय और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। वाटर आरओ के पास गुटखा खाकर थूकने से हुई गंदगी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में स्वच्छ वातावरण और सम्मानजनक इलाज हर मरीज का अधिकार है। इसमें किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।