थानागद्दी। विशेष जज (एससी-एसटी न्यायालय) अनिल कुमार यादव ने अनुसूचित जाति की महिला से सामूहिक दुष्कर्म के दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। वहीं, जज ने कोर्ट में बयान से मुकरने वाली पीड़ित के खिलाफ विरुद्ध नोटिस जारी करने का आदेश देते हुए कहा कि क्यों न मित्था आरोप लगाने पर कार्रवाई करने की नोटिस जारी किया जाए।
केराकत थाना क्षेत्र के एक गांव में छह वर्ष पहले दलित महिला ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा था। पुलिस ने दोनों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट उस समय न्यायालय में दाखिल कर दिया। लेकिन अदालत में अपने बयान बदलते हुए अभियोजन कथन का समर्थन करने से इन्कार कर दिया। मामले में कोर्ट ने शिवरामपुर खुर्द गांव के दो युवकों को संदेह का लाभ देते हुए आरोप से दोषमुक्त कर दिया। साथ ही न्यायालय ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि वादिनी ने अपने पूर्व दिए गए बयानों के विपरीत कथन किया, जिससे यह परिलक्षित होता है कि अभियुक्तों को मिथ्या साक्ष्य गढ़कर फंसाया गया था। साथ ही वादिनी को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न उसे मिथ्या साक्ष्य गढ़ने के लिए दंडित किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि वादिनी/पीड़िता को एससी/एसटी नियमावली के तहत कोई सरकारी आर्थिक सहायता दी गई है, तो उसकी वसूली जिला मजिस्ट्रेट जौनपुर की ओर से नियमानुसार की जाएगी।