जौनपुर। अप्रैल 2019 में बर्खास्त आठ उर्दू अध्यापकों की बर्खास्तगी के साथ ही उन पर प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे लेकिन एक साल तक कुछ नहीं किया गया। अब शासन ने फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई के लिए शिकंजा कसने पर मुकदमा दर्ज कराया गया लेकिन गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विभाग के अफसर एक साल तक फर्जी अध्यापकों को बचाने का प्रयास क्यों करते रहे।
दरअसल फर्जी शिक्षकों की तैनाती में विभाग आला अफसरों का भी हाथ रहा है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में नियुक्ति में हुए फर्जीवाड़ा के खुलासे के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों और कर्मचारियों पर उंगली उठने लगी है। बीएसए कार्यालय का डीसी ईएमआईएस नियुक्ति के फर्जीवाड़े में सीधे तौर पर लिप्त पाया गया है और जेल में है। इसके बाद बर्खास्त उर्दू अध्यापकों के खिलाफ एफआईआर का आदेश होने के बाद भी एक साल तक एफआईआर दर्ज न होना विभाग के जिम्मेदार अफसर और कर्मचारियों को भी शक के दायरे में ला दिया है।
जिले के अलग अलग थानों में आठ फर्जी अध्यापकों के खिलाफ चार जुलाई की रात पुलिस ने धोखाधड़ी और शासकी धन का गबन करने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। लेकिन अभीतक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एएसपी सिटी डॉ संजय कुमार का कहना है कि आठ फर्जी अध्यापकों के खिलाफ पुलिस अलग अलग थानों की पुलि ने केस दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।