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जहां भगवान की कथा यज्ञ हो वहीं तीर्थ : स्वामी उमा दास

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बरईपार। भगवान विष्णु को पुत्र के रूप पाने के लिए पहले स्त्री पुरुष मनु और शतरूपा ने नैमिष वन में हजारों वर्ष तक घोर तपस्या की। तीर्थों में सर्वश्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है। जहां प्रभु की कथा हो, जहां यज्ञशाला हो वहीं तीर्थ है। अपने घर गांव को तीर्थ बनाना चाहिए। उक्त बातें संगीतमय श्री रामकथा में कथावाचक स्वामी उमादास महराज ने लखेसर गांव में मनोहर वीर धाम पर श्रद्धालुओं के समक्ष कही। उन्होंने कथा में बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने स्वयं अपने शरीर को दो भागों में विभाजित कर प्रथम पुरुष और स्त्री मनु और शतरूपा को उत्पन्न किया। कथा के पूर्व आयोजक रामचंद्र यादव सहित मुख्य यजमान ने व्यास पीठ का पूजन किया। संगीतमय कथा में भजन और मानस की चौपाई पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। इस दौरान क्षेत्र के प्रधान प्रतिनिधि शैलेंद्र तिवारी, लक्ष्मी नारायण पांडेय, नाई कल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा, हीरालाल यादव, रामकृपाल यादव सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने कथा का रसपान किया। सई नदी के तट पर स्थित मनोहर वीर धाम में भोर से ब्रह्मवाणी के बाद क्षेत्र के पुरुष महिलाओं को योग क्रिया सिखाने के साथ निशुल्क चिकित्सा सलाह भी दी जाती है। वहीं क्षेत्र की महिलाएं लक्ष्मीनारायण यज्ञशाला में सुबह छह के पूर्व और शाम छह बजे के बाद परिक्रमा के बाद दीप प्रज्ज्वलित करती हैं।
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