विकासखंड के उमरछा गांव स्थित श्री मृत्युंजय महादेव धाम में आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामचरितमानस नवाह्न परायण पाठ एवं संगीतमय कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन शुक्रवार शाम श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा व्यास पंडित रघुश्रेय महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्म और माता पार्वती व देवाधिदेव महादेव के विवाह का मनोहारी वर्णन किया। भगवान श्रीराम के प्राकट्य उत्सव का प्रसंग सुनाते हुए पंडित रघुश्रेय महाराज ने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भक्तों के कल्याण के लिए भगवान मानव रूप में अवतार लेते हैं। कथा के दौरान ‘भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला’ के जयघोष से पंडाल गूंज उठा। शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि शिव और शक्ति का मिलन लोक कल्याण का प्रतीक है। विवाह प्रसंग के भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे।
कथा से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्य यजमान सुशील कुमार उपाध्याय, पद्मा उपाध्याय, विनोद शुक्ल, शालिनी शुक्ल, दीनानाथ उपाध्याय और सरोज उपाध्याय ने विधि-विधान से पोथी पूजन और आरती की। धार्मिक अनुष्ठान आचार्य पंडित अभिषेक मिश्र और पंडित हीरामणि उपाध्याय ने संपन्न कराया। इस दौरान रमाशंकर उपाध्याय, रामसागर शुक्ल, केशव शुक्ल, त्रिलोकीनाथ शुक्ल, सतीश उपाध्याय, कैलाश नाथ शुक्ल, लक्ष्मी उपाध्याय, अशोक दुबे, कृष्ण शुक्ल, अरविंद शुक्ल, विकास शुक्ल, संतोष शुक्ल और मोनू सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।