महिला दिवस के लिए दुर्गा मौर्य।
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जौनपुर। एक समय था कि जब घर में कोई बीमार हो जाता तो दवा के लिए भी दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता था। बच्चों की पढ़ाई के लिए कापी किताब और फीस का भी इंतजाम समय पर नहीं हो पाता था। दुर्गा मौर्या, शकुंतला, हीरावती, अमरावती, रीता जैसी कई अन्य महिलाएं हैं, जिनकी यही लाचारी थी लेकिन अब वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बन चुकी हैं बल्कि ऐसी लाचारी में जीवन जीने वाली उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणाश्रोत बन गई हैं।
जिला मुख्यालय से कोई 15 किलोमीटर दूर वाराणसी-सुल्तानपुर हाईवे से लगे बक्शा गांव की ये महिलाएं महिला स्वयं सहायता समूह के जरिए तरक्की की इबारत लिख रही हैं। 13 महिलाओं के इस समूह के पास आज ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, जीरो ट्रिल मशीन के अलावा ट्रैक्टर से चलने वाले अन्य कृषि यंत्र हैं। खेती के साथ बकरी और भैंस पालन, अचार, मुरब्बा के व्यवसाय के साथ साथ अब मशरूम उत्पादन का भी काम शुरू कर दिया है। इससे होने वाली आमदनी से कई महिलाओं ने अपने बच्चों और पति को भी दुकान खुलवा दिया है। जिससे परिवार की आमदनी बढ़ रही है। स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष दुर्गा मौर्य 1993 में स्नातक की थीं। वह कहती हैं कि शादी के बाद जब वह ससुराल आईं तो घर की माली दशा ठीक नहीं थी। वर्ष 2001 में ग्राम पंचायत अधिकारी उनके घर के पास मौजूद कुछ पुरुषों को सरकार की योजनाओं के बारे में बता रहे थे। उत्सुकतावश वह भी दूर से उनकी बातों को सुन रही थीं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के बारे में बताया तो उन्होंने महिलाओं के साथ समूह चलाने का निर्णय लिया। गांव की करीब 40 महिलाओं से बात की तो उनमें से 12 महिलाएं समूह में शामिल होने के लिए तैयार हो गईं। समूह की गतिविधियों को देख बीडीओ ने 25 हजार का सीसीएल कर दिया। अब वे बैंक से 25 हजार तक का लोन लेकर कोई काम कर सकती थीं। जिसमें 10 हजार पर कोई ब्याज भी नहीं देना होता था। सबसे पहले बकरी पालन के लिए लोन लिया। आमदनी बढ़ी तो बैंक खाते की क्रेडिट भी बढ़ती गई। वर्ष 2015 में ट्रैक्टर लिया, थ्रेसर, कल्टीवेटर, रोटावेटर, जीरोट्रिल मशीन से खुद की खेती के साथ किराए पर भी चलवाती थी उससे आमदनी बढ़ती गई। अब उन्होंने मोटर पार्ट्स की दुकान खोल रखी है, जिसे उनके पति चलाते हैं। बेटा गौरव कुमार बैंक ग्राहक सेवा केंद्र चलाता है। बेटी को पढ़ाया लिखाया तो वह एचडीएफसी बैंक में पीओ बन बंगलौर में नौकरी कर रही ही है।
कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेने के बाद अक्तूबर में समूह की सभी महिलाओं ने मिलकर मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया है। अभी दिसंबर के अंतिम सप्ताह में पहली बार एक कुंतल मशरूम पैदा किया। अब इसे और बड़े पैमाने पर करने की तैयारी की जा रही है। - दुर्गा मौर्या, अध्यक्ष महिला स्वयं सहायता समूह बक्शा।