करंजाकला (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डीफार्मा की कॉपियों में जय श्रीराम लिखने के बाद भी छात्रों को पास करने के मामले में बुधवार को नया मोड़ आ गया है। इस मामले में दोषी पाए गए शिक्षक डॉ. विनय वर्मा ने कहा कि मैं बेकसूर हूं। जो किया था, वह पूर्व कुलपति के निर्देश पर किया था। प्रो. विनय ने पूर्व कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्या पर छात्रों को पास करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
डी फार्मा प्रथम वर्ष के चार छात्रों ने उत्तर पुस्तिका में जय श्री राम और क्रिकेटरों के नाम लिखे थे। इसके बाद भी शिक्षकों ने 56 फीसदी तक अंक देकर छात्रों को पास कर दिया था। छात्र नेता उद्देश्य सिंह की शिकायत के बाद मामला प्रकाश में आया था। इसकी जांच में करीब आठ महीने लगे। पिछले दिनों परीक्षा समिति की बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन ने फैसला लिया है कि कार्य परिषद की अगली बैठक में आरोपी शिक्षक डॉ. आशुतोष गुप्ता और डॉ. विनय वर्मा को बर्खास्त कर दिया जाएगा। अब प्रोफेसर विनय ने पूर्व कुलपति निर्मला एस मौर्य पर आरोप लगाया है। प्रोफेसर ने कहा कि कुलपति ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से कहा था कि ये सभी छात्र आए दिन धरना प्रदर्शन और विश्वविद्यालय में नेतागिरी करते हैं। ये कॉपी में जो भी कुछ लिखते हैं, उन्हें अच्छे अंक देकर पास कर दिया जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें मीडिया से इस बारे में बातचीत करने से मना किया था। उनका दावा है कि पिछले आठ महीने में जो कुछ हुआ है, सब विश्वविद्यालय प्रशासन की जानकारी में हुआ है। इतना बड़ा काम कोई प्रोफेसर अकेला नहीं कर सकता। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन और फार्मेसी व अन्य विभाग के भी कई शिक्षक शामिल थे।
यह मामला पूर्व कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस मौर्य के समय का है। उस समय क्या हुआ था, मुझे जानकारी नहीं है। हो सकता है कि डॉ. विनय वर्मा अपने बचाव के लिए ये बातें कह रहे हों। हालांकि उनकी बातों में कितनी सत्यता है, इसकी जांच कराई जाएगी। - प्रो. वंदना सिंह, कुलपति, पूर्वांचल विवि।
मेरे समय का ऐसा कोई मामला नहीं है। परीक्षा और मूल्यांकन परीक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। मेरे खिलाफ साजिश की जा रही है। यह वर्तमान कुलपति के कार्यकाल का मामला है। मेरा नाम उछाला गया तो संबंधित के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराऊंगी।
- प्रो. निर्मला एस मौर्या, पूर्व कुलपति पूर्वांचल विवि।
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