महराजगंज के सराय भानी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा कहते हुए विनयानंद सरस्वती महाराज। स्रोत-संवा
महराजगंज। सराय भानी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रयागराज से आए विनयानंद सरस्वती ने कहा कलयुग में नाम स्मरण भजन व भक्ति से ही कल्याण संभव है। श्रीमद्भागवत महापुराण को 18 महापुराणों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इसे भगवान की दिव्य कथा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य का सार कहा गया है।
यह ग्रंथ मानव जीवन को धर्म, ज्ञान,भक्ति और मोक्ष का मार्ग दिखाता है। यह कलयुग में मोक्ष प्राप्त का सबसे सरल साधन माना गया है। कथा श्रवण से मन की शुद्धि, पापों का क्षय होता है। भक्ति ज्ञान और वैराग्य में वृद्धि होती है। परिवार व समाज में सद्भाव बढ़ता है। भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा जागृत होती है। भागवत कथा श्रवण से राजा परीक्षित को परम कल्याण और मोक्ष प्राप्त हुआ था।
कलयुग में यज्ञ, तप, कठिन साधना की अपेक्षा भजन को अधिक महत्वपूर्ण कहा गया है। ऐसे में श्रीमद्भागवत को कलयुग का सूर्य कहा गया है। इस दौरान आयोजक सभाजीत मिश्रा, दीपक यादव, शिव प्रसाद मिश्रा, राम सजीवन मिश्रा, सुरेश तिवारी, डा. कैलाश नाथ मिश्रा, रामसुख मिश्रा आदि सैकड़ो ग्रामीण मौजूद रहे।