तहसील में साप्ताहिक बंदी बेअसर हो चुकी है। साप्ताहिक बंदी की मंशा यह है कि व्यापारी व मजदूर को एक दिन का अवकाश मिले। इससे उनके कार्य क्षमता में वृद्धि होने के साथ ही काम में गुणवत्ता भी आएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। बंदी न होने से दुकानें खोलनी पड़ती हैं।
उद्योग व्यापार मंडल (कंछल गुट ) के नगर अध्यक्ष राशिद अली ने बताया कि सप्ताह में एक दिन अवकाश न मिलने से उलझन, नीद में कमी, एकाग्रता में कमी, थकान, सुस्ती, तनाव आदि की स्थिति बनी रहती है। मडियाहू नगर सहित बेलवा , बड़ेरी, जमालपुर ,रामपुर, पाली ,आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में व्यापारिक प्रतिष्ठान है। जहां पर काफी संख्या में मजदूर काम में लगे रहते हैं। इन सभी बाजारों में साप्ताहिक बंदी बृहस्पतिवार को निश्चित है, लेकिन किसी भी बाजार में इसका पालन नहीं किया जा रहा है। साप्ताहिक बंदी के दिन सभी दुकानें अन्य दिनों की तरह खुली रहती हैं। व्यापारी राजेश गुप्ता बताते हैं की बंदी का विशेष लाभ यह है कि हम अपने परिवार व निजी कार्यों के लिए एक दिन दे सकेंगे। यदि सातों दिन काम करेंगे तो मानसिक तनाव बढ़ेगा। व्यापारी कौशल सिंह बताते हैं की साप्ताहिक बंदी से लाभ होता है, लेकिन जब सभी व्यापारी इसका पालन करें। अधिकांश व्यापारी इसका पालन नहीं करते इसलिए मजबूरी में दुकान खोलना पड़ता है। उद्योग व्यापार मंडल (कंछल गुट ) के नगर अध्यक्ष राशिद अली ने कहा की साप्ताहिक बंदी का नियम शक्ति से लागू होना चाहिए। इसके लागू होने से सभी का फायदा होगा ।व्यापारियों की सुविधा के लिए ही साप्ताहिक बंदी का नियम बनाया गया है। इसमें श्रम विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते साप्ताहिक बंदी बेअसर रहती है।