जौनपुर। जिले में पिछले तीन दिनों में लगातार जारी बारिश से गोमती व सई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे शहरी इलाकों के साथ ही 392 गांवों में पानी घुसने का खतरा मंडराने लगा है। खतरे के निशान 73.066 मीटर के सापेक्ष पानी 70.48 मीटर पर पहुंच गया है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी तहसीलों को शनिवार को ही एडवाइजरी जारी कर दी है। जिससे किसी प्रकार की आपदा से निबटा जा सके।
जिला मुख्यालय पर गोमती का जलस्तर आठ फीट बढ़कर 15 फीट पहुंच गया है। इससे गोमती घाट, हनुमान घाट, विसर्जन घाट की सीढि़यां डूब गई हैं। नदी में खतरे का निशान 28 फीट है, ऐसे में जलस्तर 13 फीट नीचे हैं। इससे नखास, चकप्यार अली, चाचकपुर आदि आस-पास क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के दरवाजे तक पानी पहुंच गया है। जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक बढ़ते जलस्तर के लिए फिलहाल कोई सतर्कता नहीं बरती जा रही है। केराकत क्षेत्र में चार सेंटी मीटर की रफ्तार से नदी का बढ़ाव दर्ज किया गया है।
एडीएम राम अक्षयबर चौहान ने बताया कि नदियों के समीप बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग नदी व घाटी के आस-पास न जाए। बच्चों को अकेले नदी, घाटों के समीप न जाने दें, तेज हवा, बारिश व बिजली चमकने के समय बड़े पेड़ के नीचे व कच्चे मकानों में शरण लेने से बचे।
बदलापुर व मड़ियाहूं के इन गांवों में ज्यादा खतरा :
बदलापुर तहसील के अहियापुर, शाहपुर सानी, गुलरा, सियरावासी, गोपालापुर, सम्मनपुर, बलुआ, बडेरी हैं। यह गांव सबसे निचले इलाके में हैं, यहां सबसे पहले खेतों में पानी जाता है। इसके अलावा केराकत सरउज, बड़ेवर, महादेंवा, बरइछ, उदयचंदपुर, चंदवक का रामगढ़ है जो निचले इलाके में हैं। इन दोनों ही तहसीलों में गोमती नदी होकर गुजरती है।
प्रशासन की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें बचाव की सारी जानकारी दी गई है। बाढ़ चौकियों को बनाने का निर्देश दिया जा चुका है। गोताखोरों, नाविकों की लिस्ट तैयार करने को कहा गया है। जिससे गांवों में पानी प्रवेश करने पर तुरंत राहत बचाव दल सक्रिय किया जा सके। - राम अक्षयबर चौहान, एडीएम भू-राजस्व।