मछलीशहर। 19 मार्च से 27 मार्च तक रहने वाला वासंतिक नवरात्र (चैत्र नवरात्र) शुभ ग्रहों के योग के चलते महत्वपूर्ण है। मीन लग्न में चतुर्ग्रही योग बनने और शुक्र के अपनी उच्च राशि में होने के कारण यह विशेष फलदायी हो रहा है। नौ दिनों में कई शुभ संयोग बनेंगे। ज्योतिषी डॉ. शैलेश मोदनवाल बताते हैं कि इस वर्ष 19 मार्च दिन बृहस्पतिवार को वासंतिक नवरात्र ग्रह नक्षत्रों के विशेष संचरण के कारण शुभ फलदाई होगा। मीन लग्न में सूर्य, शुक्र, शनि एवं चंद्रमा की युति से चतुर्ग्रही योग के साथ वासंतिक नवरात्र का आरंभ हो रहा है। शुक्र अपनी उच्च राशि में रहेंगे, जिससे मां दुर्गा की पूजा अर्चना का विशेष फल प्राप्त होगा। मीन लग्न के अधिपति देव गुरु बृहस्पति हैं जो धर्म, अध्यात्म, भाग्य व धन के कारक माने जाते हैं, इस तरह देवगुरु की कृपा से इस वर्ष का नवरात्र विशेष लाभ देने वाला होगा। नवरात्र नौ दिनों का होगा और इन नौ दिनों में कई शुभ संयोग बनेंगे। 20 को सर्वार्थ अमृत सिद्ध योग, 21 को शनि रिक्ता समायोग, 22 को रवि योग, 23 को सर्वार्थ सिद्धि योग, 24 को द्विपुष्कर योग, 25 को बुधे भद्रा सिद्ध योग, 26 और 27 मार्च को सर्वार्थ सिद्ध योग प्राप्त होगा। 25 से 27 मार्च के मध्य मिथुन राशि में चंद्रमा और गुरु की युति के कारण गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है, जो मां के पूजन के लिए विशेष फलदायी होगा। देवी को प्रसन्न करने के लिए नवरात्र के नौ दिनों में लोभ, क्रोध, मोह, काम-वासना से दूर रहते हुए केवल देवी का ही ध्यान करना चाहिए। भक्त दुर्गा चालीसा व देवी के 32 नाम का पाठ और भगवती की आरती करने से भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।