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मेले में होती थी कमाई, अब क्या करें भाई...

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जौनपुर। इस बार विजयदशमी पर मेला नहीं लगेगा। पूरे देश के अनलॉक होने के बाद भी मेलों में कमाई करने वाले इस बार हैं। मेला में अस्थायी दुकानदार, सचल ठेले वाले, गुब्बारे बेचने वाले इस बार पटरियों पर दुकान लगाकर ही क्षतिपूर्ति का प्रयास करेंगे। चाट-पकौड़े का ठेला लगाने वाले राहुल कहते हैं कि महामारी ने धंधे को चौपट कर दिया। बचाकर रखे गए पैसे उस समय काम आए बहुत दिक्कत तो नहीं हुई लेकिन भविष्य की चिंता है कि आगे बसर कैसे होगा। मेला नहीं लगने से नुकसान होगा, लेकिन हम पटरियों पर दुकान लगाकर धंधा करने में लगे हैं। आइसक्रीम बेचने वाले जियालाल कहते हैं कि इस रोग में ठंडी चीजें ही परहेज करनी है, गर्मी में तो लॉक डाउन रहा। आइसक्रीम बेच नहीं सके। अब धीरे-धीरे स्थिति ठीक हो रही है तो लोग आइसक्रीम खाने के लिए आ रहे हैं। फिर भी उनमें ठंडी चीजों को लेकर थोड़ा भय का माहौल है। त्योहारी मेले में खिलौने की दुकान लगाने वाले मोहम्मद अरशद कहते हैं कि लॉक डाउन खुलने के बाद गली मोहल्लों में घूम-घूमकर समान बेच रहे हैं। इस बार मेला लगाने की अनुमति नहीं तो इसी तरह कमाकर परिवार का पेट पोसेंगे। गोलगप्पे का ठेला लगाने वाले जवाहरलाल कहते हैं कि मेला लगने से रोजाना कमाई से अतिरिक्त कमाई हो जाती थी। सुबह ग्यारह बजे से दोपहर तक घूमकर बेचना होता था उसके बाद शाम को मेले में ठेला लगाकर अच्छी आमदनी कर ली जाती थी लेकिन इस बार माहौल फीका पड़ा है।
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