भूगर्भ जल का अंधाधुंध हो रहे दोहन और तेजी से नीचे खिसकते जल स्तर के कारण जनपद के 12 ब्लाक को डार्क जोन घोषित किया गया है। बावजूद इसके यहां पानी के अंधाधुंध दोहन पर कोई रोक टोक नहीं है। आरओ प्लांट के नाम पर पानी का एक बड़ा व्यवसाय जिले में खड़ा हो चुका है। यहां तकरीबन 60 से अधिक प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जो जार में भरकर पानी बेच रहे हैं।
जिले भर में तकरीबन 40 हजार से अधिक जार की खपत प्रतिदिन की है। इसमें से 20 हजार जार की खपत शहर में ही हो रही है। खास बात यह कि इस प्राकृतिक संपदा के अंधाधुंध दोहन में कोई रायल्टी भी नहीं जमा की जा रही है। मड़ियाहूं और जौनपुर शहर के दो प्लांट के अलावा किसी के भी पास पानी बेचने का लाइसेंस नहीं है। इन प्लांटों को भी सिर्फ पैक कर पानी बेचने का आदेश है।
जो प्लांट लगे हैं वह पानी की शुद्धता का मानक पूरा नहीं कर रहे हैं। हाल ही में दो आरओ प्लांट से लिए गए पानी के नमूने जांच में फेल हो गए थे।भूगर्भ जल विभाग के वैज्ञानिकों की मानंे तो जमीन के अंदर मौजूद पानी का 90 प्रतिशत पानी बाहर निकालने पर अति दोहित, उससे कम पानी खर्च होने पर क्रिटिकल और 70 से 80 प्रतिशत पानी खर्च करने पर सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में रखा जाता है।