प्रधान डाकघर में पैसा निकालने के लिए लगी उपभोक्ताओं की भीड़।
शनिवार और रविवार की दो दिन की बंदी के बाद सोमवार को बैंक खुले तो पहले से ही बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा थी। ग्रामीण इलाकों में बैंक और शहर में एटीएम पर लोगों की भीड़ दिखी। काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक की अधिकतर शाखाओं में सोमवार को भी लोगों को पैसा नहीं मिला।
घंटों बैंक पर लाइन लगाने के बाद लोगों को मायूस लौटना पड़ा। बताया गया कि बैंक के पास कैश ही नहीं है। यूबीआई की भी कई शाखाओं में भुगतान नहीं हो सका। शादी विवाह और खेती-किसानी के लिए लोग अपना ही पैसा बैंक से नहीं निकाल पा रहे हैं।
पैसे के लिए तरह तरह की दुश्वारियां झेल रहे लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही। नोटबंदी के 20 दिन बाद भी बैंकों में कैश की समस्या खत्म नहीं हुई। यूबीआई की नौपेड़वा शाखा में तीन घंटे तक लाइन में खड़े होने के बाद भी लोगों को पैासा नहीं मिल सका।
यहां पैसा निकालने आए बेलापार गांव निवासी रमाशंकर ने बताया कि तीन घंटे तक लाइन में खड़ा रहा। बाद में पता चला कि बैंक के पास कैश ही नहीं है। खेत की जुताई के लिए पैसा चाहिए। कहीं से कोई कर्ज भी नहीं मिल रहा है। काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक बक्शा में लगातार छठवें दिन भी लोगों को पैसा नहीं मिल सका।
केजीएसजी बैंक की बक्शा शाखा से रुपये निकालने आए हरिश्चंद्र सिंह का कहना है कि बैंक खाते में उनका 80 हजार रुपये जमा है। रिश्तेदार की बेटी की शादी के लिए 25 हजार रुपये की मदद करनी है लेकिन चार दिन से बैंक आ रहे और लौट जा रहे।
इस बैंक के पास पैसे ही नहीं आ रहे हैं। उधर यूबीआई की शंभूगंज शाखा भुगतान जरूर हुआ पर मुश्किल से 30 लोगों को पैसा निला तभी कैश खत्म हो गया। शादी के लिए दो लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए गए।