जौनपुर। आयुष और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने के लिए सरकार तमाम जतन कर रही है। लेकिन धरातल पर इसका असर नहीं दिखा रहा। जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में न तो व्यवस्थाएं हैं और न ही इलाज की सुविधाएं। पर्याप्त डॉक्टरों की तैनाती भी नहीं है। इससे ओपीडी में सिर्फ 5-10 मरीज ही पहुंचते हैं। दवाओं के लिए सालाना 15 लाख रुपये का बजट मिलता है फिर भी मरीजों को दवाएं उपलब्ध नहीं हो पाती है। कहने को जिले में 36 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं लेकिन सिर्फ 35 चिकित्सकों की तैनाती है। तीन अस्पतालों में चिकित्सक के दो-दो पद हैं लेकिन यहां सिर्फ एक डॉक्टर है। तीन में तो कोई डॉक्टर ही नहीं है। शेष में एक-एक डाॅक्टर की तैनाती है। कई अस्पताल चिकित्सक विहीन हैं। अस्पतालों में ओपीडी के बाद ताला लग जाता है। चौकियां क्षेत्र के लखनपुर गांव में आयुर्वेदिक चिकित्सालय बनाया गया है। शाहगंज में 25 बेड, चौकिया व मड़ियाहूं में 15-15 बेड का अस्पताल है। 26 अस्पतालों में चार बेड की व्यवस्था है। करीब सात अस्पतालों में ओपीडी होती है। विभागीय उपेक्षा के चलते आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी हो गई है। अधिकांश अस्पतालों में पेयजल, शौचालय, मरीजों को बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने से ओपीडी के नाम पर खानापूर्ति होती है।
ओपीडी में दस से अधिक नहीं बढ़ रही मरीजों की संख्या : आयुर्वेदिक अस्पतालों में देखा जाए तो बीते एक वर्ष में ओपीडी में मरीजों की संख्या दस के पार नहीं पहुंची है। मरीजों की संख्या कहीं पांच है तो कहीं छह तो कहीं सिर्फ आठ। ऐसा इसलिए है क्योंकि मरीजों की इलाज और दवाइयों की सुविधाएं नहीं मिल रही हैै।
दवा के लिए 15 लाख का आता है सालाना बजट : आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदारी के लिए आयुष विभाग से 15 लाख का बजट हर साल आता है। इसी से जिले से सभी 36 अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा कुछ दवाएं विभाग स्वयं अस्पतालों को मुहैया कराता है। इसके बाद भी अस्पताल में दवाओं की कमी बनी रहती है। मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है।
सिकरारा में 30 बेड का बन रहा अस्पताल : सिकरारा के भरतपुर में 30 बेड के अस्पताल का निर्माण शुरू हो गया है। नींव भरी जा रही है। पट्टी जियाराय में अस्पताल बने हैं लेकिन अभी तक हैंडओवर नहीं हुआ है। अस्पताल में ताला बंद है। खालिसपुर में डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से अस्पताल बेमतलब साबित हो रहा है।
आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं। कुछ अस्पतालों का निर्माण चल रहा है। पूरा होने के बाद मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलने लगेंगी। -डॉ. कमल कुमार, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी