फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूविवि में बनेगा अनुवाद उकृष्टता केंद्र.

विज्ञापन
विज्ञापन
जौनपुर। देश में बिखरे लोक साहित्य को सहेजने और उन्हें सरल भाषाओं में जन-जन तक पहुंचाने का पूर्वांचल विवि केंद्र बनेगा। प्रदेश सरकार ने यहां अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने को मंजूरी दी है। यह प्रदेश का पहला केंद्र होगा, जहां विभिन्न भाषाओं के लोक साहित्य व संस्कृति को दूसरी भाषाओं में अनुवाद कर लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इसके संचालन का जिम्मा विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग को सौंपा गया है। विभाग इसके संचालन की रूपरेखा बनाने में जुटा है। जल्द ही इसे शुरू करने की तैयारी है।
विज्ञापन

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए सरकार हिंदी को केंद्रिंत करते हुए अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए विवि. में पहले ही भाषा उत्कृष्टता केंद्र खोलने की मंजूरी मिल चुकी है। विवि को ही प्रदेश में संचालित छह अन्य भाषा केंद्रों की निगरानी का भी जिम्मा सौंपा है। अब इसी के तहत यहां अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र भी खोला जा रहा है। इस केंद्र में देश के अलग-अलग हिस्सों की लोक भाषाओं में उपलब्ध साहित्य का अन्य दूसरी भाषाओं में अनुवाद कर उसे प्रचारित-प्रसारित किया जाएगा। अब तक इन्हें संरक्षित करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। लिहाजा बेहद प्रभावी होने के बाद भी उनका दायरा एक खास क्षेत्र तक ही सिमट कर रह जाता था। इस योजना से न सिर्फ देश की विभिन्न संस्कृतियों में उपलब्ध लोक साहित्य व संस्कृति का संरक्षण होगा, बल्कि दूसरे क्षेत्र के लोगों को भी उसे जानने-समझने का भरपूर मौका मिलेगा। स्थानीय लोक साहित्य व संस्कृति को वैश्विक पटल पर भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद हैं।
---
लुप्त हो रहे साहित्य को मिलेगा संरक्षण
बांग्ला, तमिल, उड़िया, संस्कृत, आसामी, पंजाबी सहित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में तमाम महत्वपूर्ण लोक साहित्य लिखे गए हैं। भाषा की समझ न होने से पूर्वांचल के लोग इससे अनभिज्ञ हैं। इसी तरह पूर्वांचल की अवधी, भोजपुरी में भी लोक कला और संस्कृति से जुड़ी तमाम चीजों को लिपिबद्ध किया गया है। यह दूसरे क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रहा। अंग्रेजी, संस्कृत में भी ऐसे लोक साहित्य व पुस्तकों की भरमार है। इन्हें संपूर्ण भारत समेत वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के लिए अनुवाद केंद्र काम करेगा। इसमें विषय विशेषज्ञों के माध्यम से सेवाएं ली जाएंगी।
विज्ञापन

---
प्रदेश के छह भाषा केंद्रों की निगरानी भी करेगा पूविवि
प्रदेश के विभिन्न विवि में छह भाषा केंद्र पहले से ही संचालित हैं। इसमें उदय प्रताप कॉलेज वाराणसी, इलाहाबाद डिग्री कॉलेज प्रयागराज, सेंट जांस कॉलेज आगरा, बप्पा श्रीनारायण वोकेशन पीजी कॉलेज लखनऊ, हिंदू कॉलेज मुरादाबाद और दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज गोरखपुर शामिल हैं। इन केंद्रों पर विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग रोजगारपरक कोर्स चला रहे हैं। पूर्वांचल विवि में हिंदी, संस्कृत, तमिल और नेपाली भाषा की पढ़ाई के लिए नए केंद्र को मंजूरी मिली है। इसके साथ ही इन सभी केंद्रों की निगरानी का जिम्मा भी दिया गया है। विवि में बनने वाला नया अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र भी भाषा केंद्र के सुचारु संचालन में सहयोग करेगा।
वर्जन
अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के अनुरूप भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लेखकों की कृतियों का अन्य भाषाओं में अनुवाद करेगा। इससे लोक साहित्य एवं संस्कृति को वैश्विक पटल पर बढ़ावा मिलेगा। -प्रो. निर्मल एस. मौर्य, कुलपति, पूविवि।
---
कुलपति के अथक प्रयासों से शासन ने विवि में अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र बनाने की मंजूरी दी है। इसके संचालन का जिम्मा विभाग को मिलना बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए रूपरेखा बनाई जा रही है। जल्द ही शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी।
विज्ञापन

-डॉ. मनोज कुमार मिश्र, विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार, पूविवि।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें